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Petrol-Diesel Rate: नायरा के बाद अब सरकारी तेल कंपनियों ने जारी किए पेट्रोल-डीजल के नए रेट, जानें कितना हुआ बदलाव?


Petrol-Diesel Rate Today on June 2: प्राइवेट सेक्टर की दिग्गज तेल कंपनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने कल 1 जुलाई 2026 को पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती है.

कंपनी के इस फैसले के बाद अब देश की आम जनता को उम्मीद है कि सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) भी रिटेल फ्यूल की कीमतों में कटौती का ऐलान कर सकती हैं. बता दें कि नायरा की नई कीमतें देश भर में उसके 7000 से ज्यादा पंपों पर लागू हो चुकी हैं.

नायरा ने कब बढ़ाए थे दाम?

नायरा ने मार्च में अमेरिका और ईरान में जंग के दरमियान जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया, तब पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. अब चूंकि अमेरिका और ईरान के बीच दोहा में चल रही शांति वार्ता से स्थिति काफी हद तक सामान्य हुई है. होर्मुज (Strait of Hormuz) से होकर क्रूड ऑयल की सप्लाई भी होने लगी है इसलिए कंपनी ने भी पहले बढ़ाई गई कीमतें कम कर दी हैं.

सरकारी तेल कंपनियों ने नहीं घटाए दाम

भारत में सरकारी तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) – ने आज 2 जुलाई को भी देश में ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. बता दें कि देश भर में पेट्रोल पंपों के 90% से ज्यादा आउटलेट इन्हीं तीन कंपनियों के हैं. 

शहर  पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर) डीजल की कीमत (प्रति लीटर)
दिल्ली   102.12 रुपये 95.20 रुपये
मुंबई  111.21 रुपये 97.83 रुपये
कोलकाता 113.51 रुपये 99.82 रुपये
अहमदाबाद 101.70 रुपये 97.84 रुपये
चेन्नई  107.77 रुपये  99.55 रुपये
पटना  113.35 रुपये  99.36 रुपये
शिमला 102.55 रुपये 94.61 रुपये
चंडीगढ़  101.51 रुपये  89.47 रुपये
पुणे  111.52 रुपये 98.15 रुपये

जल्दबाजी में नहीं सरकारी तेल कंपनियां

पश्चिम एशिया में तनाव के चरम पर पहुंचने पर जब ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई थीं, तब सरकारी तेल कंपनियों को काफी नुकसान (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ा था. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि अभी कंपनियां पिछले कुछ महीनों में हुए नुकसान की भरपाई करना चाहती हैं और साथ ही उनकी नजर वैश्विक स्थिति के उतार-चढ़ाव पर भी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि भले ही कच्चे तेल की कीमतें कम हुई हैं, लेकिन सीजफायर के जारी रहने और सप्लाई में फिर से रुकावट आने की संभावना अभी भी बनी हुई है. 

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