- अभियोजन के सबूतों में विसंगतियां और FIR में देरी मिली।
मद्रास हाई कोर्ट ने पांच नाबालिग लड़कियों से यौन शोषण मामले के आरोपी शख्स की दोषसिद्धि और मौत की सजा को रद्द करने का बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के सबूतों में अजीब विसंगतियां थीं और पीड़ित बच्चियों के बयानों के कुछ अहम हिस्से तोते की तरह रटे हुए प्रतीत होते हैं.
अदालत में जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश और केके रामाकृष्णन की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामले में पीड़ितों के बयानों से संकेत मिलता है कि पुलिस के सामने बयान देने और अदालत में गवाही देने से पहले उन्हें पूरी तरह से सिखाया-पढ़ाया गया था. सभी पीड़िताओं ने एक जैसी बात कही कि उन्हें बाकी पीड़िताओं के साथ हुए कथित यौन शोषण के बारे में पता नहीं था.
न्याय किसी की बलि देकर हासिल नहीं किया जा सकता- हाई कोर्ट
कोर्ट ने कहा, ‘इन सभी के दिए बयानों में एक ही तरह की समानता ने गंभीर संदेह की स्थिति पैदा की है. इसलिए, सभी पीड़िताओं की गवाही कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं में तोते की तरह दोहराई हुई प्रतीत होती है.’
मद्रास हाई कोर्ट की बेंच ने कहा, ‘न्याय किसी भी कमजोर व्यक्ति को दूसरे के पक्ष में बलि चढ़ाकर हासिल नहीं किया जा सकता है. कानून को बच्चों की सुरक्षा करनी चाहिए, लेकिन आरोपी को ऐसे दोषसिद्धि के हवाले नहीं किया जा सकता, जो ठोस सबूत पर आधारित न हो.’
पीड़िताओं की मां के बयानों से पुरानी दुश्मनी का शक- हाई कोर्ट
कोर्ट ने यह भी कहा, ‘दो पीड़िताओं और एक पीड़िता की मां के बयानों से आरोपी के प्रति पहले से दुश्मनी होने का शक होता है.’ ऐसे में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के मामले की विश्वसनीयता परखते वक्त इस परिस्थिति का बहुत बड़ा महत्व है.
इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने मामले में FIR दर्ज करने में हुई देरी को लेकर भी सवाल उठाया. कोर्ट ने कहा, ‘स्कूल में गुड टच-बैड टच जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होने के पांच दिनों के बाद ही शिकायत दर्ज की गई, लेकिन इस देरी के पीछे का कोई साफ कारण नहीं बताया गया.
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