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UCC पर केंद्र सरकार के साथ कौन, कौन सी पार्टी खिलाफ, जानें


यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर NDA के भीतर नई चर्चा शुरू हो गई है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ऐलान 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA की सभी 21 राज्य सरकारों में UCC लागू किया जाएगा. इसके बाद गठबंधन के सहयोगी दलों के रुख सामने आने लगे हैं. ज्यादातर दलों ने इस विचार का समर्थन किया है, लेकिन कुछ पार्टियां इसे लेकर अभी सावधानी बरत रही हैं.

सबसे ज्यादा ध्यान बिहार की JD(U) के रुख पर है. पार्टी ने साफ किया है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर UCC का समर्थन कर सकती है, लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है. हालांकि, इस संबंध में पार्टी ने जानकारी दी है कि उनके लोग अमित शाह से मिलेंगे. इसके अलावा आंध्र प्रदेश में सरकार चला रही TDP ने UCC का समर्थन किया है. शिवसेना और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सेक्युलर यानी HAM(S) ने भी शाह के बयान का स्वागत किया है.

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TDP ने UCC का किया समर्थन

लोकसभा में TDP के 16 सांसद हैं और केंद्र की NDA सरकार के लिए पार्टी का समर्थन काफी महत्वपूर्ण है. TDP के लोकसभा नेता लावू कृष्ण देवरायालु ने कहा कि पार्टी UCC का समर्थन करेगी. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं चल रही है और जरूरत पड़ने पर अलग-अलग पक्षों से बातचीत के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा.

TDP के एक नेता ने कहा कि भारत में अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के बीच समान नागरिक कानून की जरूरत है. हालांकि पार्टी का मौजूदा रुख उसके पुराने बयान से अलग नजर आता है. 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद NDA में शामिल होने से पहले TDP प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि UCC के मुद्दे पर पार्टी मुस्लिम समुदाय के साथ खड़ी रहेगी.

आंध्र प्रदेश में मुस्लिम आबादी करीब 10 फीसदी

2011 की जनगणना के मुताबिक आंध्र प्रदेश की कुल आबादी 8.45 करोड़ से ज्यादा थी. इसमें करीब 7.48 करोड़ हिंदू और लगभग 80.8 लाख मुस्लिम आबादी दर्ज की गई थी. यानी राज्य की आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी थी. इसी वजह से TDP का UCC को लेकर बदला हुआ रुख राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

बिहार में JD(U) ने साफ किया अपना रुख

बिहार में NDA की सहयोगी JD(U) ने UCC को लेकर अलग रुख अपनाया है. पार्टी नेता और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने कहा कि JD(U) राष्ट्रीय स्तर पर UCC का समर्थन करती है, लेकिन बिहार में इसे लागू नहीं किया जाएगा. रजक ने कहा कि पार्टी के नेता नीतीश कुमार पहले ही इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर चुके हैं. उनके मुताबिक UCC जैसे बड़े कानून पर पूरे देश में व्यापक सहमति बननी चाहिए.

पार्टी ने फिलहाल अपने पुराने रुख में बदलाव नहीं किया है. JD(U) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय झा ने भी कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत करेगी. उन्होंने संकेत दिया कि UCC को लेकर NDA के अंदर आगे चर्चा हो सकती है.

LJP ने ड्राफ्ट आने तक इंतजार का संकेत दिया

बिहार में बीजेपी की एक और सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने भी अभी कोई अंतिम फैसला नहीं बताया है. पार्टी का कहना है कि जब UCC का पूरा ड्राफ्ट या प्रस्ताव सामने आएगा, तभी उसके कानूनी प्रावधानों और संभावित असर का आकलन किया जाएगा.

इससे साफ है कि NDA के सभी सहयोगी इस मुद्दे पर एक जैसी स्थिति में नहीं हैं. कुछ दल खुलकर समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ पार्टियां प्रस्ताव का पूरा स्वरूप सामने आने का इंतजार कर रही हैं.

पश्चिम बंगाल में BJP जल्द बढ़ा सकती है कदम

UCC को लेकर पश्चिम बंगाल में भी राजनीतिक हलचल तेज हो सकती है. बीजेपी की राज्य में नई सरकार बनने के बाद पार्टी ने संकेत दिया है कि वह इस कानून को लागू करने की दिशा में काम शुरू करेगी. बीजेपी बंगाल अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि UCC पार्टी की पुरानी प्राथमिकताओं में शामिल रहा है और अब इसे लागू करने की दिशा में कदम उठाना सरकार की जिम्मेदारी है.

उन्होंने दावा किया कि राज्य में बड़ी संख्या में लोग भी इस कानून के समर्थन में हैं. हालांकि बीजेपी की नई सहयोगी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI ने अभी इस मुद्दे पर अपना अंतिम रुख तय नहीं किया है. पार्टी का कहना है कि UCC गंभीर विषय है और किसी निर्णय से पहले इस पर विस्तार से चर्चा की जाएगी.

पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी 27 फीसदी से ज्यादा

2011 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल की कुल आबादी करीब 9.13 करोड़ थी. इसमें हिंदुओं की संख्या करीब 6.44 करोड़ और मुस्लिम आबादी लगभग 2.47 करोड़ थी. राज्य की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी 27 फीसदी से ज्यादा थी. ऐसे में पश्चिम बंगाल में UCC का मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

शिवसेना और HAM ने खुलकर किया समर्थन

NDA की सहयोगी शिवसेना ने UCC को समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता से जोड़ते हुए इसका समर्थन किया है. पार्टी नेता श्रीकांत शिंदे ने कहा कि UCC पार्टी की पुरानी वैचारिक सोच के अनुरूप है और सरकार को इस दिशा में आगे बढ़ाने में शिवसेना सहयोग करेगी. हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने भी अमित शाह के बयान का स्वागत किया और UCC को पार्टी का समर्थन दिया.

NDA के लिए सहयोगियों का समर्थन क्यों अहम?

लोकसभा में TDP के 16 सांसद हैं. शिवसेना के 13, JD(U) के 12, LJP (राम विलास) के 5 और HAM(S) का एक सांसद है. राज्यसभा में TDP और JD(U) के 4 और शिवसेना के दो सदस्य हैं, इसलिए UCC जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दे पर NDA के सहयोगी दलों का रुख सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा.

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