ईरान पर लगातार 13 दिनों तक सैन्य हमले करवाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक आगे की कार्रवाई रोकने का फैसला किया. यह फैसला उस समय आया जब एक दिन पहले ही उन्होंने इशारा किया था कि अमेरिका पहले से भी बड़ा हमला करने की तैयारी कर रहा है. पत्रकारों से गुरुवार (23 जुलाई) को बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा था कि ईरान को अभी तक ठीक तरह से नुकसान नहीं पहुंचा है. उन्होंने यह भी कहा था कि वह पहले से बड़े हमले पर विचार कर रहे हैं और फैसले लेने के बेहद करीब हैं. इसके बाद अमेरिका ने लगातार 13वीं रात भी ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए.
हालांकि, अगले ही दिन स्थिति बदल गई. पेंटागन ने 14वीं रात के लिए भी नए हमलों की योजना तैयार कर ली थी, फिर भी ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई रोकने का आदेश दे दिया. इससे सवाल उठने लगे कि आखिर 24 घंटे के भीतर ऐसा क्या हुआ जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति का रुख बदल दिया. पहले सामने आई रिपोर्टों में बताया गया था कि ट्रंप कूटनीतिक बातचीत के लिए अधिक अवसर देना चाहते थे. इसके अलावा अमेरिकी सेना को यह चिंता भी थी कि मिसाइल इंटरसेप्टर का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है. अब एक नई रिपोर्ट में इस फैसले के पीछे की एक और महत्वपूर्ण वजह सामने आई है.
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टॉप कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर की सलाह
एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना के टॉप कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने ट्रंप को सलाह दी थी कि मौजूदा सैन्य अभियान अपनी तय सीमा तक पहुंच चुका है और इसे जारी रखने से खास फायदा नहीं मिलेगा. एडमिरल कूपर ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और उसके आसपास के इलाकों में दो सप्ताह तक चले हमलों के कारण ईरान की समुद्री हमले करने की क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है. उन्होंने बताया कि जिन प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाया जाना था, उनमें से ज्यादातर पहले ही तबाह किए जा चुके हैं. उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में केवल बचे हुए टारगेट पर बड़े स्तर की सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है, लेकिन मौजूदा स्थिति में उसी स्तर की बमबारी जारी रखने का कोई खास कारण नहीं दिखता.
एडमिरल कूपर की सलाह क्यों थी जरूरी?
एडमिरल कूपर की सलाह उन प्रमुख कारणों में शामिल थी, जिन्होंने ट्रंप के अंतिम फैसले को प्रभावित किया. इसके बाद ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों में होने वाले नए हमलों पर रोक लगाने का आदेश दिया. इस बीच जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने भी ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को चेतावनी दी थी कि एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलों का तेजी से कम होता स्टॉक आने वाले समय में अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए समस्या पैदा कर सकता है.
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