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Xप्लेन: ट्रंप के नए बर्थराइट सिटीजनशिप ऑर्डर से भारतीयों के बच्चों पर क्या संकट?


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो नए कार्यकारी आदेशों पर 6 अगस्त 2027 को हस्ताक्षर किए. इनका मकसद बर्थराइट सिटिजनशिप को सीमित करना और ‘बर्थ टूरिज्म’ पर रोक लगाना है. यह कदम उस समय आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 30 जून 2026 को ट्रंप के पुराने आदेश को खारिज कर दिया था. नए आदेश पुराने आदेश की तुलना में ज्यादा टारगेटेड हैं. आखिर ट्रंप के नए आदेशों का असर भारतीयों पर कैसे और कितना खतरनाक पड़ सकता है…

क्या कहते हैं ट्रंप के नए आदेश?

ट्रंप ने दो अलग-अलग कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं:

1. बर्थ टूरिज्म पर कसेगा शिकंजा

यह आदेश कमर्शियल बर्थ टूरिज्म को निशाना बनाता है. इसके तहत उन लोगों को अमेरिका में एंट्री नहीं मिलेगी, जो बच्चे को जन्म देने के लिए अमेरिका आते हैं. व्हाइट हाउस के मुताबिक, बर्थ टूरिज्म वह प्रथा है जहां गर्भवती महिलाएं अमेरिकी धरती पर बच्चे को जन्म देकर उसे अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए ट्रैवल करती हैं.

नए नियमों के तहत विजिटर वीजा आवेदकों पर ज्यादा सख्ती से जांच होगी. अगर वीजा अधिकारियों को बर्थ टूरिज्म का शक होगा तो वे आवेदन को खारिज या पोस्टपोन्ड कर सकते हैं.

2. किन लोगों के बच्चों को नहीं मिलेगी नागरिकता?

दूसरा आदेश उन कैटेगरी को बढ़ाता है जिन्हें बर्थराइट सिटिजनशिप के लिए अयोग्य माना जाएगा. इनमें शामिल हैं:

  • विदेशी राजनयिकों या दूतावास कर्मचारियों के बच्चे.
  • ‘एलियन एनिमी’ घोषित व्यक्तियों के बच्चे.
  • आतंकवादी संगठनों से जुड़े लोगों के बच्चे.
  • विदेशी सरकारों की लॉबी करने वाले लोगों के बच्चे.
  • धोखाधड़ी से नागरिकता हासिल करने वालों के बच्चे.
  • कमर्शियल ट्रांजेक्शन के जरिए अमेरिका में बच्चे को जन्म देने वाली माताओं के बच्चे.
  • उन अमेरिकी क्षेत्रों में जन्मे बच्चे जहां संघीय कानून नागरिकता नहीं देता.

प्रशासन का दावा है कि ये नए आदेश सुप्रीम कोर्ट के फैसले से टकराते नहीं हैं, क्योंकि ये चुनिंदा कैटेगरीज के लोगों को निशाना बनाते हैं.

पुराना आदेश क्या था और सुप्रीम कोर्ट ने क्यों खारिज किया था?

30 जून 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के पुराने कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया था. इस आदेश में ट्रंप ने अवैध प्रवासियों या अस्थायी तौर पर अमेरिका में रहने वालों के बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता देने से इनकार करने की कोशिश की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ट्रंप का आदेश अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन करता है. यह संशोधन अमेरिकी धरती पर जन्मे लगभग हर व्यक्ति को खुद ब खुद नागरिकता प्रदान करता है.

चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स की अगुआई वाली बेंच ने इस फैसले को ट्रंप के लिए एक करारा झटका माना. ट्रंप ने खुद इसे ‘बहुत दुर्भाग्यपूर्ण फैसला’ बताया और कहा कि वे बर्थराइट सिटिजनशिप पर प्रतिबंधों को आगे बढ़ाते रहेंगे.

ट्रंप के फैसले का भारतीयों पर क्या असर पड़ेगा?

इसका जवाब समझने के लिए हमें भारतीयों को तीन हिस्सों में बांटना होगा…

कैटेगरी 1: H-1B, L-1, F-1 और दूसरे वैध वीजा वाले भारतीय

जो भारतीय प्रोफेशनल्स और उनके परिवार अमेरिका में H-1B, L-1, O-1 या F-1 OPT वीजा पर कानूनी रूप से रह रहे हैं, उनके लिए यह सबसे बड़ी राहत की खबर है. उनके यहां अमेरिका में पैदा होने वाले बच्चों को पहले की तरह जन्मसिद्ध नागरिकता मिलती रहेगी. इसके पीछे तीन ठोस वजहें हैं:

  • ये लोग पूरी तरह कानूनी रूप से वहां मौजूद हैं, ये कोई ‘birth tourist’ नहीं हैं जो विजिटर वीजा पर कुछ दिन के लिए आए हों.
  • सुप्रीम कोर्ट का 30 जून 2026 का फैसला अभी भी पूरी तरह लागू है और 14वां संशोधन उनके बच्चों को सुरक्षा देता है.
  • 1898 का ऐतिहासिक केस ‘यूनाइटेड स्टेट्स बनाम वोंग किम आर्क’, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि कानूनी रूप से अमेरिका में रह रहे गैर-नागरिक माता-पिता के यहां जन्मा बच्चा अमेरिकी नागरिक होगा.

आज अगर किसी भारतीय H-1B प्रोफेशनल के घर अमेरिका में बच्चा पैदा होता है, तो वह बच्चा अमेरिकी नागरिक ही होगा.

कैटेगरी 2: विजिटर वीजा (B1/B2) पर आने वाले रिश्तेदार

नए आदेश का सबसे बड़ा असर उन भारतीय परिवारों पर पड़ सकता है जो टूरिस्ट वीजा पर अमेरिका जाने की सोच रहे हैं. खासकर तब जब यात्रा का मकसद प्रेग्नेंसी के दौरान किसी रिश्तेदार की देखभाल करना, या खुद बच्चे को जन्म देना हो.

अब कांसुलर अधिकारी बहुत सख्ती से यह जांच करेंगे कि वीजा एप्लीकेशन का असली मकसद क्या है. परिवार के सदस्यों से अतिरिक्त सवाल पूछे जा सकते हैं और ज्यादा दस्तावेज मांगे जा सकते हैं. नतीजतन, वीजा प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है. एयरपोर्ट पर भी ज्यादा पूछताछ हो सकती है.

कैटेगरी 3: बर्थ टूरिज्म को सीधे निशाना बनाया गया

व्हाइट हाउस के मुताबिक, चीन और कुछ अन्य देशों के साथ भारत भी टॉप देशों में शामिल है. यहां से लोग बर्थ टूरिज्म के लिए अमेरिका का रुख करते हैं. माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के अनुमान के मुताबिक, अमेरिका में हर साल होने वाले लगभग 3.5 से 3.6 मिलियन जन्मों में से करीब 22,000 से 26,000 मामले अकेले बर्थ टूरिज्म से जुड़े हो सकते हैं.

सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज ने 2020 में यह आंकड़ा 20,000 से 25,000 सालाना बताया था. अब जो भारतीय परिवार प्रेग्नेंसी के दौरान खासतौर पर सिर्फ इसलिए अमेरिका जाने की योजना बना रहे हैं ताकि बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाई जा सके, उनके लिए रास्ता बेहद मुश्किल होने वाला है. इन लोगों का वीजा मिलना अब आसान नहीं होगा.

क्या नए आदेश भी अदालत में चुनौती से बच पाएंगे?

कानूनी विशेषज्ञों की राय में इस बार के आदेश भी शायद ही अदालती चुनौतियों से बच पाएं. अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) ने तो तुरंत ही इन्हें ‘असंवैधानिक’ करार दे दिया है. ACLU के वकील कोडी वोफ्सी ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मुद्दे पर फैसला दे चुका है कि जन्मसिद्ध नागरिकता संविधान से गारंटीड है. कोई भी अतिरिक्त कार्यकारी आदेश संविधान के मायने नहीं बदल सकता. जो भी कार्यकारी आदेश जन्मसिद्ध नागरिकता को दोबारा लिखने की कोशिश करेगा, उसका हश्र भी पिछले वाले जैसा ही होगा.’

पूर्व बाइडेन प्रशासन की अधिकारी और अब UnidosUS में कार्यरत डेबोरा फ्लीशाकर ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. फ्लीशाकर ने कहा, ‘सिर्फ पांच हफ्ते पहले सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया था कि जन्मसिद्ध नागरिकता राष्ट्रपति की सनक के अधीन नहीं है. यह एक संवैधानिक गारंटी है जो 150 से ज्यादा सालों से कायम है. आज के कार्यकारी आदेश उस फैसले को दरकिनार करने की एक कोशिश भर हैं.’

6 अगस्त को खुद ट्रंप भी ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए थोड़ा सतर्क दिखे. ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है कि ये संवैधानिक हैं,’ लेकिन फिर यह भी माना कि जन्मसिद्ध नागरिकता के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमारे लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण रहा. इस वजह से हम अब इसमें बदलाव कर रहे हैं.’



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