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असम कैबिनेट के 9 बड़े फैसले, बाल संरक्षण नीति को मिली मंजूरी


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  • कोचिंग संस्थानों का नियमन और युवा विभाग गठन हुआ।
  • हाइड्रोकार्बन नीति और आठ नए उप-जिले स्वीकृत।
  • बाल संरक्षण, श्रमिक कल्याण नीतियां भी कैबिनेट ने स्वीकारीं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार (18 अगस्त, 2026) को राज्य कैबिनेट की बैठक में लिए गए कई अहम फैसलों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि असम के मंत्रिमंडल ने युवाओं की शिक्षा, विकास और सुरक्षा, इंडस्ट्रियल सेक्टर, मजदूरों के कल्याण से लेकर राज्य में हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन को बढ़ावा देने के मुद्दों पर गंभीर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं.

उन्होंने कैबिनेट मीटिंग के बाद गुवाहाटी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, ‘हमने सरकार चलाई है और पिछले 10 सालों में हमारी ज्यादातर योजनाएं युवाओं पर केंद्रित रहे हैं. यही वजह है कि युवाओं ने इस सरकार को पूरे दिल से समर्थन देते हुए अपना वोट दिया है. हमारी निजुत मोइया योजना, निजुत बाबू योजना, खेल महारण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मुख्यमंत्री ट्रिपल-ए योजना जैसी अगर असम सरकार की 10 योजनाएं है, तो उनमें से नौ युवाओं के लिए समर्पित है.’

असम कैबिनेट ने लिए कौन-कौन से 9 अहम फैसले?

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि हमारी सरकार ने जो महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, उनमें-

  • हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन को बढ़ावा देना

उन्होंने बताया कि असम कैबिनेट ने असम हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन, प्रोडक्शन एंड अपस्ट्रीम इकोसिस्टम डेवलपमेंट पॉलिसी, 2026 को मंजूरी दी. इस नीति का मकसद असम में हाइड्रोकार्बन के एक्सप्लोरेशन से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना है.

  • कोचिंग संस्थानों के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करना

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, ‘कैबिनेट ने असम प्राइवेट कोचिंग इंस्टीट्यूट्स (कंट्रोल एंड स्टूडेंट मेंटल हेल्थ सेफगार्ड) रूल्स, 2026 को लागू करने को मंजूरी दी. इसमें 50 या उससे ज्यादा छात्रों वाले हर एक कोचिंग संस्थान को डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर के पास अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा. संस्थानों में SC, ST, OBC और EWS, दिव्यांग, LGBTQ+ छात्रों और ट्रॉमा, वियोग या आत्महत्या करने की कोशिश कर चुके छात्रों के लिए एक संवेदनशील और भेदभाव-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करना होगा.

  • युवा सशक्तिकरण और विकास विभाग का गठन

उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने युवा सशक्तिकरण और विकास विभाग के गठन को मंजूरी दी है. यह विभाग युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, करियर गाइडेंस, उद्यमिता (Entrepreneurship), लीडरशिप डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े विभिन्न योजनाओं के समन्वय पर ध्यान देगा.

  • बराक वैली स्थित मिनी सेक्रेटेरियट के नाम बदलना.

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, ‘कैबिनेट ने मिनी सचिवालय, बराक वैली का नाम बदलकर असम सचिवालय, बराक वैली, सिलचर करने को मंजूरी दी है. इस सचिवालय में 32 प्रमुख और महत्वपूर्ण विभागों को संचालन को शामिल किया जाएगा.

  • डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटीज को मजबूत करना.

उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने असम में डेयरी कोऑपरेटि सोसायटीज के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल, आसान और तेज करने को मंजूरी दी. इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा, जिससे बिजनेस करना आसान होगा और मिल्क कोऑपरेटिव सोसायटीज के मैनेजमेंट को सुव्यवस्थित किया जा सकेगा.

  • 8 नए सह-जिलों का संचालन.

उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने राज्य में 8 नए सह-जिलों को संचालित करने की मंजूरी दी है. इन आठ सह-जिलों में कमलपुर, बरहामपुर, रंगानदी, सिसिबोरगांव, चबुआ-लाहोवाल, खुमताई, कातिगोड़ा और बोर्खोला का नाम शामिल है. 

  • बाल संरक्षण नीतियों का क्रियान्वयन.

सरमा ने बताया कि कैबिनेट ने असम स्टेट चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी, 2026 को मंजूरी दी है. इसके साथ ही, असम जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) रूल्स, 2026 को भी मंजूरी दी गई है. इनसे जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015 और पॉक्सो रूल्स, 2020 को प्रभावी रूप से लागू करने में मदद मिलेगी.

  • इंडस्ट्रियल और मजदूर कल्याण को मजबूत करना.

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने असम इंडस्ट्रियल रिलेशंस रूल्स, 2026 के नोटिफिकेशन को मंजूरी दी है. यह नया नियम तीन पुराने कोलोनियल और आजादी के बाद के बनाए गए नियमों की जगह लेगा. इसके साथ ही, कैबिनेट ने असम सोशल सिक्योरिटी रूल्स, 2026 को भी मंजूरी दी, जिसे सेंट्रल कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के तहत तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य असम के मजदूर इकोसिस्टम को ज्यादा प्रभावी और वर्कर-सेंट्रिक बनाना है.

  • असम को शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करना.

उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल ने गुवाहाटी स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) और अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के स्थायी परिसरों के निर्माण के लिए जमीन के ट्रांसफर और अलॉटमेंट को मंजूरी दी.

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