इजरायल में अरब के राजनीतिक गुटों के गठबंधन जॉइंट लिस्ट और अरब नेतृत्व वाली राआम पार्टी ने देश के अगले पीएम के रूप में यशार पार्टी के अध्यक्ष गादी आइसेनकोट का सपोर्ट किया है.
द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉइंट लिस्ट ने गुरुवार को अपना समर्थन देने की घोषणा की. सरकार गठन को लेकर होने वाली बातचीत के दौरान वे राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के सामने औपचारिक रूप से आइसेनकोट के नाम की सिफारिश करेंगे. राआम पार्टी के 8 सांसदों ने पहले ही अपना समर्थन देने का वादा कर दिया था.
राष्ट्रपति कर सकते हैं, नई सरकार की सिफारिश
AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने एक बयान में बताया कि जाइंट लिस्ट ने गुरुवार को घोषणा की है कि वे आज शाम राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को अपने फैसले के बारे में बताएंगे. वे राष्ट्रपति से सिफारिश करेंगे कि सरकार बनाने की जिम्मेदारी गादी आइसेनकोट को सौंपी जाए.
अब आइसेनकोट को 120 सीटों वाली संसद के 67 सदस्यों का समर्थन मिलने की उम्मीद है. इस तरह वे मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से आगे निकल गए हैं. इनके लिकुड पार्टी गठबंधन के पास 58 सीटें हैं. इस आंकड़े में अरब- नेतृत्व वाली राआम पार्टी के आठ सांसद और जॉइंट लिस्ट के 11 सदस्य शामिल हैं. पिछले हफ्ते हुए आम चुनाव में इजरायल के 120 सीटों वाली संसद में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने रिकॉर्ड 19 सीटें जीती हैं.
आइसेनकोट का अबतक क्या रहा है रुख
यह समर्थन ऐसे वक्त आया है, जब इससे पहले आइसेनकोट ने अपनी सरकार में अरब पार्टियों को शामिल करने को लेकर रुख अपनाया था. 26 सितंबर को चैनल 12 को दिए एक इंटरव्यू में याशर नेता ने कहा था कि राआम उनकी अगली सरकार का हिस्सा नहीं होगी. उन्होंने तर्क दिया था कि उस समय कोई भी अरब या अति रुढ़िवादी पार्टी गठबंधन में शामिल होने के लिए उनकी शर्तों को पूरा नहीं करती थी. आइसेनकोट ने पहले कहा था कि फिलहाल मुझे ऐसी कोई अरब या हारेदी पार्टी नहीं दिखती, जो इन सिद्धांतों को नहीं मानती हो. इसमें मंसूर अब्बास भी शामिल हैं. इसलिए वे मेरी अगली सरकार हिस्सा नहीं होंगे.
नेतन्याहू को समर्थन को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है. नेतन्याहू गुट के पास 53 सीटें हैं, लेकिन हो सकता है कि उन्हें अपने सभी सदस्यों का समर्थन न मिल पाए. यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म के भीतर देगे हातोराह गुट ने कहा है कि वह किसी भी उम्मीदवार के नाम की सिफारिश नहीं करेगा. अति रूढ़िवादी गुट ने नेतन्याहू से दूरी बना ली है. इसका कारण यह है कि उनकी सरकार हारेदी पुरुषों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने वाला कानून पारित करने में विफल रही है.
राष्ट्रपति ने सरकार बनाने की कोशिशों को तेज किया
इधर, राष्ट्रपति ने बातचीत का सिलसिला जारी कर दिया है. उन्होंने पिछले हफ्ते आए संसदीय चुनावों के आधिकारिक परिणामों को स्वीकार कर लिया है. राजनीतिक दलों के साथ परामर्श शुरू कर दिया है. ताकि यह तय किया जा सके, कि अगली सरकार बनाने की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए. इससे पहले हर्जोंग ने सभी दलों से आग्रह किया था कि वे एक और चुनाव की नौबत आने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. उन्होंने कहा कि कोई भी समझदार व्यक्ति अगर हमारे सामने मौजूद सुरक्षा और कूटनीनितक चुनौतियां हमारे आसपास बदलते क्षेत्रीय हालात और हमें भीतर से बांटने वाले मुद्दों पर गौर करें, तो वह समझ जाएगा कि हमारे कंधों पर कितनी ब ड़ी जिम्मेदारी है.
हर्जोग ने रिलिजियस जायोनिज्म, जेहुत, शास और इजरायल बेतेनु पार्टियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. उन्होंने बताया कि इन प्रतिनिधिमंडलों ने अपनी सिफारिशें सौंपी हैं कि किस नेसेट सदस्य को सरकार बनाने का जनादेश दिया जाना चाहिए. हर्जोग ने कहा है कि गुरुवार को भी बातचीत का दौर जारी रहेगा. इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद ही राष्ट्रपति की तरफ से उम्मीदवार को चुना जाएगा.
