स्कूल में हिजाब पहनने के मामले में एक स्टूडेंट (छात्रा) की याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट की तरफ से खारिज कर दिया गया है. अब इस पर बीजेपी के नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने रिएक्शन दिया है. उन्होंने सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि इस मुद्दे पर सांप्रदायिक तनाव और अशांति पैदा करने की कोशिश नहीं करना चाहिए.
नकवी ने न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा है कि किसी को भी हिजाब के मुद्दे पर सांप्रदायिक तनाव या अशांति पैदा करने की कोशिश नहीं करना चाहिए. शिक्षण संस्थानों के अपने ड्रेस कोड, अनुशासन के नियम और कामकाज के तरीके होते हैं. सभी को इनका सम्मान करना चाहिए. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस बात की पुष्टी की है कि जैसा कि पहले भी कई अन्य अदालतों और अधिकारियों ने किया है. यह मुद्दा किसी की आस्था या सम्मान के लिए कोई खतरा नहीं है.
क्या है पूरा मामला?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने आदेश में कहा है कि हेडस्कार्फ पहनना इस्लाम की जरूरी धार्मिक प्रथा नहीं माना जा सकता. यह बात एक मुस्लिम छात्रा की याचिका पर कही है, जिसमें उसने स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की इच्छा जाहिर की थी. उन्होंने कहा कि जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिवीजन बेंच ने 21 अगस्त 2026 के एक आदेश में प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल में तय यूनिफॉर्म के साथ हेडस्कार्फ पहनने की इजाजत मांगने वाली 11वीं क्लास की छात्रा की याचिका खारिज कर दी.
छात्रा ने याचिका में स्कार्फ पहनाने को एक धार्मिक प्रथा बताया था
छात्रा ने याचिका में तर्क दिया था कि स्कार्फ पहनने को एक जरूरी धार्मिक प्रथा बताया था. इसे संविधान के आर्टिकल 14 और 19(1)(a) के तहत उसके मौलिक अधिकारों से सुरक्षा मिली हुई है. उसने कहा कि वह उसी स्कूल में छठी क्लास से ही बिना किसी आपत्ति के हेडस्कार्फ पहनती आ रही थी. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि कई सालों तक स्कार्फ पहनना ऐसा कोई अधिकार नहीं बनाता, जिसके आधार पर स्कूल को अपनी यूनिफॉर्म पॉलिसी में ढील देने या बदलाव करने के लिए मजबूर किया जा सके.
