पाकिस्तानी नेवी के जहाज PNS हुनान ने हाल ही में जानबूझकर भारत के डिस्ट्रॉयर INS कोलकाता को टक्कर मारी, जिसके बाद नई दिल्ली ने इस्लामाबाद के सामने कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया. दुनिया के सामने असल डर पाकिस्तानी वॉरशिप नहीं बल्कि उसके सनकी आतंकी सोच वाले अफसरों के रवैये का है. करीब 12 साल पहले पाकिस्तानी नेवी से जुड़ी एक घटना ने सभी को सन्न कर दिया था.
पाकिस्तानी नेवी के कट्टरपंथी अफसरान ने एक वॉरशिप को हाईजैक करने, उसे अरब सागर में ले जाने और अमेरिकी नेवी के युद्धपोतों पर हमला करने की योजना बनाई थी. माना जाता है कि उस समय वॉरशिप पर परमाणु हथियार भी मौजूद था. 2014 में 2 कट्टरपंथी अधिकारियों लेफ्टिनेंट जीशान रफीक और ओवैस जख्रानी द्वारा रची गई इस साजिश का जिक्र स्टीव कोल की 2018 की बेस्टसेलर किताब ‘डायरेक्टरेट एस’ (Directorate S) में किया गया है, जो अफगानिस्तान में अमेरिका के गुप्त युद्ध के बारे में है.
PNS जुल्फिकार पर रची गई साजिश
PNS जुल्फिकार उस समय पाकिस्तानी नेवी का सबसे हाईटेक युद्धपोत था क्योंकि ये चीन में बने 3,144-टन वजन वाले चार ‘टाइप F-22P’ क्लास फ्रिगेट में से पहला था. इस साजिश के मास्टरमाइंड 2 नेवी ऑफिसर रफीक और जख्रानी आतंकी संगठन अल-कायदा के मेंबर थे. अमेरिकी क्रू और कप्तान को बंधक बनाकर युद्धपोत को हाईजैक करना उनकी साजिश का सिर्फ एक हिस्सा था. इन आतंकी प्रवृत्ति वाले अधिकारियों ने अमेरिकी नेवी के जहाजों को नष्ट करने की योजना बनाई थी.
अमेरिकी नेवी का USNS बना निशाना
पाकिस्तानी नेवी के अधिकारियों ने बैकपैक में छिपाकर जुल्फिकार पर हथियार पहुंचाए थे. उन्होंने मिसाइल रूम और ऑपरेशन रूम के दरवाजों की डुप्लिकेट चाबियां बना ली थीं, ताकि वे शिप के कमांडिंग अधिकारियों के बिना भी इन प्रतिबंधित जगहों पर जा सकें. ज़ुल्फ़िकार पर लगी बंदूक और C-802 मिसाइलों को शिप के मुख्य ऑपरेशन रूम के बाहर से भी तैयार और ऑपरेट करने के बारे में भी उन्होंने जानकारी हासिल कर ली थी. उस वक्त अमेरिकी नेवी के USNS को मुख्य निशाना बनाना था.
गोलीबारी में मारे गए 3 हमलावार
6 सितंबर 2014 की सुबह कराची में लेफ्टिनेंट रफीक और जखरानी PNS ज़ुल्फ़िकार पर सवार हुए. मरीन की वर्दी पहने उनके कई साथी एक छोटी नाव में बंदरगाह के पास पहुंचे. एक सतर्क गार्ड ने उन्हें देख लिया और गोलीबारी शुरू हो गई. इसमें रफीक और जखरानी समेत 3 हमलावर मारे गए. उन्हें अपने हथियारों के जखीरे का इस्तेमाल करने या फ्रिगेट की तोपों से गोली चलाने का मौका तक नहीं मिला.
कहां से आया साजिश का आइडिया?
USSR की एक घटना को देखकर उन्होंने ये साजिश रची थी. 1975 में सोवियत नौसेना के एक कैप्टन ने बगावत कर दी और सोवियत नौसेना के फ्रिगेट ‘स्टोरोज़ेवोय’ को हाईजैक करके बाल्टिक सागर लाया गया. सोवियत जेट विमानों ने जहाज को रोक लिया और एक साल बाद कैप्टन पर मुकदमा चलाकर उसे फांसी दे दी गई थी. इसी घटना से प्रेरित होकर टॉम क्लैंसी ने 1984 में काल्पनिक थ्रिलर ‘द हंट फ़ॉर रेड अक्टूबर’ लिखी.
अब कहां हैं वो अधिकारी?
इस हमले के लगभग 6 हफ़्ते बाद रॉ ने कराची से मिली एक एजेंट की रिपोर्ट के आधार पर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को बताया कि हमले के समय PNS ज़ुल्फ़िकार पर एक न्यूक्लियर वॉरहेड मौजूद था. कोल ने लिखा, “अगर यह रिपोर्ट सच थी, तो यह इतिहास में परमाणु हथियार रखने वाली किसी जगह पर हुआ पहला ज्ञात आतंकवादी हमला होता.”
इस साजिश में शामिल पाकिस्तान नेवी के 5 अफसर जो बच गए थे, उन्हें मार्च 2016 में एक गुप्त मिलिट्री ट्रायल के बाद नेवल ट्रिब्यूनल ने मौत की सजा सुनाई थी. इनमें सब-लेफ्टिनेंट हम्माद अहमद, इरफ़ानुल्लाह, मुहम्मद हम्माद, अर्सलान नज़ीर और हाशिम नज़ीर शामिल थे. हालांकि 2024 में उनकी मौत की सजा पर रोक लगा दी गई लेकिन अभी वे सब कहां हैं, इसके बारे में किसी को पता नहीं है.
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