जम्मू-काश्मरी में आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका देते हुए जम्मू के रियासी जिले में जम्मू पुलिस ने पाकिस्तान में बैठे पांच आतंकी हैंडलर्स की संपत्तियां ज़ब्त कीं. रियासी पुलिस ने माहौर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR नंबर 70/2024 की जांच के दौरान पाकिस्तान में बैठे पांच आतंकी हैंडलर्स की अचल संपत्तियों को ज़ब्त कर लिया है. यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और E&IMCO अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया था.
ज़ब्ती की कार्रवाई SDPO माहौर, पारुल भारद्वाज के नेतृत्व में एक पुलिस टीम ने की. आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने और उनके लिए फंड जुटाने के मकसद से इस्तेमाल की जा रही, जिन लोगों की अचल संपत्तियों को ज़ब्त किया उनमें अलाफ दीन पुत्र मीर बाज़, निवासी शाजरू, की 07 कनाल ज़मीन शामिल है.
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इन चार की संपत्ति जब्त की
इसके साथ ही गुलाम मोहम्मद उर्फ गामा पुत्र मोहम्मद यूसुफ निवासी शाजरू की 10 कनाल 11 मरला जमीन, मोहम्मद अशरफ पुत्र अब करीम, निवासी चक्रस की 17 मरला ज़मीन, शब्बीर अहमद पुत्र मोहम्मद यूसुफ, निवासी चक्रस कि 07 कनाल 03 मरला ज़मीन, बहार दीन पुत्र अब्दुल सत्तार चोपन, निवासी सिलधर की 08 कनाल 01 मरला ज़मीन शामिल है.
आतंकी हैंडलर्स की मदद कर रहे थे
जांच के दौरान विश्वसनीय सबूत मिले और आरोपी आतंकी ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भाग गए थे और अभी सीमा पार से आतंकी हैंडलर्स के तौर पर काम कर रहे हैं. वे सक्रिय रूप से आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं, उनमें मदद कर रहे हैं और उनका समन्वय कर रहे हैं. जांच में यह भी पता चला कि इन संपत्तियों को बेचा या हस्तांतरित किया जा सकता था, और उनसे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को फंड करने और उन्हें जारी रखने के लिए किया जाना था.
इन जानकारियों के आधार पर, रियासी पुलिस ने पुलिस मुख्यालय से ज़रूरी मंज़ूरी लेने के बाद, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के संबंधित प्रावधानों के तहत संपत्तियों को ज़ब्त कर लिया, ताकि टेरर फाइनेंसिंग (आतंकवाद के लिए फंडिंग) के लिए उनके गलत इस्तेमाल को रोका जा सके.
आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने की रणनीति
यह कार्रवाई आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले वित्तीय ढांचे को खत्म करने के रियासी पुलिस के पक्के इरादे को दिखाती है. आतंकी गतिविधियों से जुड़े लोगों की संपत्तियों को निशाना बनाकर, पुलिस का मकसद आतंकी नेटवर्क को तोड़ना और देश-विरोधी तत्वों को उनकी गतिविधियों को जारी रखने के लिए ज़रूरी संसाधन न मिलने देना है.
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