- अख्तर ने ‘मिस्टर 10 परसेंट’ छवि पर कसा तंज।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के हिंदू अल्पसंख्यकों को लेकर दिए बयान पर स्क्रीनराइटर जावेद अख्तर ने कड़ी आलोचना की है. उन्होंने जरदारी की मिस्टर 10 परसेंट वाली छवि को लेकर आईना दिखाते हुए कहा कि मैं समझ सकता हूं कि आप हमेशा हर उस चीज के प्रति असंवेदनशील रहे हैं, जो 10 प्रतिशत से कम है.
पाकिस्तानी राष्ट्रपति की जावेद अख्तर ने बखिया उधेड़ी
जावेद अख्तर ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की भाषण की आलोचना करते हुए शनिवार (15 अगस्त, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा किया. उन्होंने जरदारी पर निशाना साधते हुए उनकी उस छवि का भी जिक्र किया, जिसमें उन्हें मिस्टर 10 परसेंट कहा जाता रहा है. यह पाकिस्तान में लगाए गए उन आरोपों की तरफ इशारा है कि वह पाकिस्तानी सरकार के परियोजनाओं से कथित तौर पर हिस्सा लेते थे.
अख्तर ने लिखा, ‘पाकिस्तान के मिस्टर जरदारी, जो बेनजीर भुट्टो से शादी के बाद सुर्खियों में आए थे, कहते हैं कि वे अपने देश में 3-4 प्रतिशत हिंदुओं की जनसंख्या को बर्दाश्त करते हैं. तो मिस्टर जरदारी मैं समझ सकता हूं कि आप हमेशा हर उस चीज के प्रति अंसवेदनशील रहे हैं, जो 10 परसेंट से कम होता है.’
Mr Zardari of Pakistan who had come into the limelight after Benazeer Bhutto had married says that they tolerate the 3-4 percent Hindu population Lin their country . I understand Mr Zardari you have always being insensitive to all under the sun which is less than 10 % .
— Javed Akhtar (@Javedakhtarjadu) August 15, 2026
पाकिस्तान में हिंदू आबादी पर जरदारी ने क्या दिया था बयान?
दरअसल, यह विवाद पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस (14 अगस्त, 2026) पर आयोजित एक कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद शुरू हुआ. वीडियो में जरदारी ने यह दावा किया कि उनके देश और वहां की मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी पाकिस्तान की 3-4 प्रतिशत हिंदू जनसंख्या को बर्दाश्त करती है.
वीडियो में आसिफ अली जरदारी ने कहा, ‘भारतीयों का नजरिया अलग है. उनके दिमाग में अपना एजेंडा है. वे अखंड भारत में विश्वास करते हैं, लेकिन बीच में बहुत कुछ ऐसा है, जिसे वे भूल गए हैं.’ उन्होंने आगे कहा, ‘हम मुसलमान है, वे नहीं है, लेकिन हम ऐसे मुसलमान हैं, जिनकी मानसिकता है कि हम पाकिस्तान में 3-4 प्रतिशथ हिंदू जनसंख्या को बर्दाश्त करते हैं. वे उतने ही आजाद और अच्छे हैं, जितने कहीं और थे. वे उनके साथ रहने के बजाय हमारे साथ रहना पसंद करेंगे.’
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