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‘तीनों चुनाव आयुक्त स्थिति साफ क्यों नहीं करते’, क्या बोले पूर्व CEC कुरैशी?


चुनाव आयोग पर खुलासे के बाद से राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है, लेकिन इतने गंभीर आरोपों के बाद भी अब तक चुनाव आयुक्तों की तरफ से किसी तरह की सफाई नहीं आई है. जब एबीपी न्यूज ने इन तीनों चुनाव आयुक्तों के सामने आकर स्थिति साफ करने को लेकर सवाल पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी से किया तो आइए जानते हैं, उन्होंने क्या कहा है? 

पूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी ने कहा, ‘इसका एक ही हल है, क्योंकि दोनों चुनाव आयुक्तों के बारे में खुलासा हुआ है, इसका एक ही समाधान है कि एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हो, जिसमें तीनों मौजूद हों, और तीनों बोलें, कि यह खुलासा गलत है. और जो तथ्य हैं, उन्हें सामने लाएं.’

कुरैशी ने कहा, ‘इसमें हम जानना चाहेंगे, कि यह जो 14 फैसले हैं, यह बताइए, इनमें क्या क्या फैसले हैं, जो एक तरफा पिछले डेढ़ 2 साल में लिए गए हैं. वो वैलिड हों या गलत हों, या अच्छे हों या बुरे. बहुमत से कितने फैसले लिए गए, वो भी गलत हों या सही. और बिना दो अन्य आयुक्तों के बिना, सीईसी साहब ने जो ऑर्डर जारी किए हैं, वो सारे गैर कानूनी हैं. वो कमीशन के फैसले नहीं कहे जा सकते हैं.’ 

कुरैशी ने 2008 जम्मू-कश्मीर चुनाव से जुड़ा सुनाया दिलचस्प किस्सा

पूर्व चुनाव आयुक्त ने जम्मू कश्मीर से जुड़ा एक वाकया साझा किया. इसमें उन्होंने बताया कि एक दफा कश्मीर के लिए किया था. 2008 में उस वक्त हमारे सीईसी गोपालास्वामी थे, नवीन चावला थे, और मैं था. उस वक्त हमारे कार्यप्रणाली में बंटवारा हुआ. तब उस समय अमरनाथ यात्रा के समय जमीन से जुड़ा कुछ विवाद हो गया था. बड़ी पोलराइजेशन हुई. हम इलेक्शन कराने की उम्मीद लगाए बैठे थे, और उस समय वो चुनाव असंभव हो गए. और मिलिटैंट ने भी बॉयकॉट शुरू कर दी, नेताओं ने कहा कि इलेक्शन आगे बढ़ा दो. मेरी राय यह हुई थी कि अगर हमने इलेक्शन आगे बढ़ा दिए, तो मिलिटैंट के डर से तो फिर हम कभी इलेक्शन नहीं करा पाएंगे. क्योंकि हर बार वो बॉयकॉट कॉल कर देंगे.

उन्होंने आगे बताया, इस पर गोपालास्वामी ने कहा कि हमें इलेक्शन आगे बढ़ा देना चाहिए, नेता भी कह रहे हैं, चुनाव आगे बढ़ाओ वरना खून खराबा हो जाएगा, मैंने कहा कि साहब 6 महीने बाद हालात सुधरेंगे की और बदत्तर होंगे, कोई गारंटी नहीं. हमें बहादुरी दिखाना चाहिए, इलेक्शन कर डालिए. नवीन चावला ने सपोर्ट किया, गोपाला स्वामी आउटवोट हो गए. चीफ इलेक्शन कमिश्नर आउटवोट हो गए. हम लोगों का फैसला चला. लेकिन हम लोग डिगिनिफाइड लोग थे, गोपालास्वामी ने उस फैसले को सर माथे पर रखकर पूरा सहयोग दिया. बहुत अच्छा इलेक्शन कराने में मदद की.

चार महीने तक कोई मीटिंग नहीं हुई

इसके अलावा कुरैशी ने कहा, ‘देखिए, जुबानी फैसले नहीं होते. अगर एकतरफा फैसले हैं, तो गलत बात है. जो भी फैसला होता है, वो लिखित होता है. उसमें अधिकारियों के साइन होते हैं. चार-चार महीने तक किसी तरह की मीटिंग नहीं हुई. देश में इतनी मुश्किल हालात हैं, तब भी नहीं हुई. एसआईआर चल रहा है. हम नॉर्मल दिन, जब कोई इलेक्शन नहीं तब भी हफ्ते में दो से तीन बार मिलते हैं. और जब इलेक्शन होता है तो रोजाना मिलते हैं. एसआईआर तो इलेक्शन से ज्यादा जरूरी चीज है, तो रोजाना मिलना चाहिए. चार महीने तक कोई मीटिंग न होना, ये क्या हो रहा है.’ 

कैबिनेट सेक्रेटरी के क्यों पास गए? औचित्य ही नहीं

उन्होंने कहा, ‘देखिए जोशी साहब और संधू साहब तो कोई अनपढ़ तो हैं, नहीं, उनको भी सारे रूल मालूम हैं. वह उसी छोर से आए हैं, जिससे सीईसी साहब आए हैं. वो भी इतने इम्पोर्टेंट पदों से आए हैं. उन्होंने भी मुद्दे उठाए हैं. हालांकि, उन्हें कैबिनेट सेक्रेटरी के पास जाना कोई औचित्य ही नहीं था. कैबिनेट सेक्रेटरी एक ब्यूरोक्रेट्स हैं कि इलेक्शन कमीशन एक कानूनी संस्था है, तो उनको राष्ट्रपति के पास जाना चाहिए था.’

इसके अलावा कुरैशी ने कहा है कि सभी आरोपों पर इलेक्शन कमीशन का एक डिटेल बयान आना चाहिए. 





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