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दिल्ली में वाहन फिटनेस जांच हुई हाईटेक, बुराड़ी में शुरू हुआ ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन


दिल्ली में अब वाहनों की फिटनेस जांच आधुनिक तरीके से तकनीक आधारित और पारदर्शी होगी. शनिवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बुराड़ी में देश के सबसे बड़े ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) का उद्घाटन किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुरू हुए सेवा संकल्प अभियान के तहत शुरू किए गए इस केंद्र में हर साल एक लाख वाहनों की स्वचालित फिटनेस जांच की जा सकेगी.

बुराड़ी का यह अत्याधुनिक एटीएस पांच लेन का है. इसकी सालाना क्षमता 40 हजार भारी मोटर वाहनों (एचएमवी) और 60 हजार हल्के मोटर वाहनों (एलएमवी) की है. यहां वाहन की फिटनेस जांच के लिए पूरी प्रक्रिया स्वचालित होगी. जांच के दौरान ब्रेक की क्षमता, सस्पेंशन का प्रदर्शन, हेडलाइट की स्थिति, साइड-स्लिप, -स्लिप, उत्सर्जन स्तर और वाहन के निचले हिस्से समेत कई तकनीकी मानकों की जांच की जाएगी.

तीन हाईटेक ATS ने सालाना ढाई लाख वाहनों का हो सकेगा फिटनेस टेस्ट
सरकार का मानना है कि ऑटोमेटेड व्यवस्था से वाहन फिटनेस टेस्ट और जांच ज्यादा वैज्ञानिक, निष्पक्ष और भरोसेमंद तरीके से हो सकेगी. इससे पहले 3 सितंबर को तेखंड में भी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन शुरू किया गया था. उसकी सालाना क्षमता करीब 72 हजार वाहनों की है. नंद नगरी, तेखंड और अब बुराड़ी में एटीएस शुरू होने के बाद राजधानी में ऑटोमेटेड वाहन टेस्टिंग की कुल क्षमता सालाना 2.5 लाख से ज्यादा वाहनों तक पहुंच गई है.

बुराड़ी ATS में सालाना 1 लाख वाहनों के टेस्ट की क्षमता
परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि बुराड़ी एटीएस का शुरू होना दिल्ली की वाहन फिटनेस जांच व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि है. उनका कहना है कि इससे कमर्शियल वाहन मालिकों को अपने घर के नजदीक आधुनिक फिटनेस जांच की सुविधा मिलेगी. बुराड़ी एटीएस को रिकॉर्ड एक साल में तैयार किया गया है. करीब एक लाख वाहनों की सालाना क्षमता के साथ यह देश के सबसे अधिक क्षमता वाले ऑटोमेटेड टेस्टिंग केंद्रों में शामिल है.

सिर्फ सर्दियों में प्रदूषण से निपटना काफी नहीं
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण की समस्या का हल सिर्फ सर्दियों में किए जाने वाले अस्थायी उपायों से नहीं निकलेगा. सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण को पूरे साल चलने वाली प्रक्रिया के तौर पर लिया है. इसके लिए परिवहन, हरित क्षेत्र बढ़ाने, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, कचरा प्रबंधन और तकनीक आधारित निगरानी जैसे क्षेत्रों में एक साथ काम किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण किसी एक सीमा में नहीं रुकता. दिल्ली-एनसीआर की हवा पर आसपास के कई इलाकों का भी असर पड़ता है. इसके बावजूद दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए ठोस कदम उठाना सरकार की जिम्मेदारी है. इसी सोच के तहत वाहनों की फिटनेस जांच व्यवस्था को तकनीक से जोड़ा जा रहा है.

1 अक्टूबर से पीयूसी को लेकर सख्ती
आपको बताते चलें कि वाहनों की फिटनेस के साथ पीयूसी व्यवस्था को भी मजबूत करने की तैयारी है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि 1 अक्टूबर से वैध पीयूसी से जुड़ी प्रवर्तन व्यवस्था लागू की जाएगी. पीयूसी जारी करने वाले केंद्रों की निगरानी और उनके संचालन को भी तकनीक के जरिए ज्यादा मजबूत बनाया जाएगा. सरकार का कहना है कि उनका फोकस सिर्फ प्रदूषण पर बात करने तक सीमित नहीं है. प्रदूषण नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है. सड़क पर चलने वाले वाहनों की फिटनेस और उत्सर्जन मानकों का पालन सुनिश्चित करके लंबे समय तक प्रदूषण पर नियंत्रण और स्वच्छ हवा एवं सुरक्षित परिवहन व्यवस्था के लक्ष्य को हांसिल किया जा सकता है.

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