एसआईआर और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर हुए खुलासे पर अब विवाद गहराता ही जा रहा है. एक तरफ विपक्ष हमलावर है, जो वहीं सत्ताधारी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अब पूरे मामले में बचाव की भूमिका में नजर आ रहा है. बंगाल के मुख्यमंत्री से लेकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर बयान जारी किया है.
चुनाव आयोग के समर्थन में क्या बोले BJP मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘एसआईआर को लेकर जो भ्रम इन्होंने लगातार फैलाया है. ऐसा नहीं है कि पहली बार एसआईआर इलेक्शन कमीशन ने किया हो, इससे पहले भी इस देश के अंदर अलग-अलग समय में, ज्यादातर समय में कांग्रेस नेतृत्व की सरकार की इस देश में रही है. 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 में भी एसआईआर के कार्रवाई संपन्न हो चुकी है. उस सब के बावजूद, इस बार की एसआईआर की कार्रवाई को लेकर जिस प्रकार की हायतौबा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आरजेडी समेत अन्य पार्टियों ने मचाई है, वो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है.’
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि 27 लाख नाम हटाने की जिम्मेदारी ममता बनर्जी की है. न कि बीजेपी या चुनाव आयोग की है. न्यायिक अधिकारियों ने यह फैसला उनके द्वारा दायर एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद लिया है.
एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर कांग्रेस आरोप लगा रही है. चुनाव आयोग ने एसआईआर को सर्वसम्मति से सहमति से लागू किया, लेकिन अपनी विफलता को छुपाने के लिए चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र वाला देश है. दुनिया का सबसे युवा देश भारत है. यहां बड़े परिवार में पैदा होसकते हैं, लेकिन गाली नहीं दे सकते. कोर्ट ने इंदिरा गांधी को आयोग्य घोषित किया था.
भारतीय जनता पार्टी ने अपने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रेस नोट से यह मामला सुलझ गया है. पार्टी के मुख्यमंत्रियों ने अलग-अलग राज्यों की राजधानियों में एक ही सुर में यही बात कही है. बीजेपी ने अपने बयान में कहा है कि चुनाव आयोग ने विपक्ष के हर आरोप का बिंदुवार जवाब दिया है.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि कोई वोट नहीं चुराया गया, बल्कि राहुल गांधी की बुद्धि चोरी हो गई है. गांधी संविधान की रक्षा का दावा करते हुए संस्थानों को बदनाम करके अराजकता फैलाना चाहते हैं.
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा है कि विपक्षा अपनी चुनावी हार को छिपाने के लिए झूठ फैला रही है. उन्होंने पूछा है कि 24 जून 2025 के उन आदेशों पर गंभीर आरोप लगाने से पहले कांग्रेस ने तथ्यों की जांच क्यों नहीं की, जो देशव्यापी एसआईआर के बारे में थे. जिन्हें पूरी सहमति से पारित किया गया था.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि कांग्रेस 100 से ज्यादा चुनाव हारने के बाद देश विरोधी हरकतों पर उतर आई है. चुनाव आयुक्तों के संयुक्त बयान, जिसमें एक मेज पर तीनों की फोटो के साथ प्रेस नोट जारी किया गया था, ने देश की छवि खराब करने की साजिश का पर्दाफाश कर दिया है.
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि इस मुद्दे पर विपक्ष का रुख अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए था. दिल्ली में चल रहे वोटर लिस्ट के सुधार के दौरान एक तिहाई वोटर्स के नाम हटा दिए गए. बाकि बचे वोटरों में से एख तिहाई को नोटिस भेजे गए. पहले के समय कांग्रेस के निर्देशों पर चुनाव आयोग काम करता था.
गुजरात के भूपेंद्र पटेल ने कहा है कि जब कांग्रेस चुनाव जीतती थी, तो वह लोकतंत्र की जीत और चुनाव आयोग की निष्पक्षता की बात करती थी. लेकिन जब मोदी के नेतृ्त्व में बीजेपी जीती, तो उसने वोट चोरी और धांधली के झूठे आरोप लगाए. भारत की विकास दर 7.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है. देश दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है.
राहुल गांधी ने किया रहस्यमयी पोस्ट
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा है कि मुझे समुद्र में तब तैरना पसंद है, जब लहरें तेज हों. इससे यह सीख मिलती है कि तूफानीपन भी शांति का ही एक रूप है.
जयराम रमेश बोले- प्रेस नोट के दावों की सच्चाई आ चुकी
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा है कि चुनाव आयोग द्वारा कल रात जारी किए गए प्रेस नोट के दावों की सच्चाई पहले ही सामने आ चुकी है. यह भी साफ हो चुका है कि वह असल में क्या है-डैमेज कंट्रोल की एक हताश कोशिश, जिसमें सब कुछ छिपाने की कोशिश की गई है. कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया. अब उस पूरी तरह अर्थहीन प्रेस नोट के दावों को और ध्वस्त करने वाली यह प्रतिक्रिया है.
ओवैसी बोले- आपको नोटिस का जवाब देना होगा
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि एसआईआर लागू है. आपको नोटिस का जवाब देना होगा. अगर नाम हटाया जाता है तो क्या होगा, यह हम देखेंगे. एनआरसी लागू किया जाएगा. हो सकता है कि एसआईआर वोटर लिस्ट के आधार पर एनआरसी किया जाए. इसलिए नोटिस का जवाब दें. आप न सिर्फ वोट देने के अधिकार खो सकते हैं, बल्कि अपनी नागरिकता भी खो सकते हैं.
