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बाढ़ के हीरो: असम के क्वारी गांव के लोगों ने बचाईं 2000 जिंदगियां


19 जुलाई को असम में आई विनाशकारी बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई, जिसे प्रभावित लोग शायद ही कभी भूल पाएंगे. नेपाली खूटी, बिहूबोर, संताक, नंबर-2 क्वारी गांव, मिचिंग गांव समेत आसपास के कई इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए. देखते ही देखते पूरा क्षेत्र पानी में डूब गया. लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों की छतों और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो गए और घंटों तक मदद का इंतजार करते रहे.

इसी भयावह स्थिति के बीच नंबर-2 क्वारी गांव के लोगों ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी आज पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है. अपनी जान की परवाह किए बिना गांव के लोगों ने छोटी-छोटी नावों के सहारे राहत और बचाव अभियान चलाया और दावा किया कि उन्होंने आसपास के पांच गांवों के लगभग 1,500 से 2,000 लोगों की जान बचाई.

‘1,500 से 2,000 लोगों को सुरक्षित निकाला’ – ग्रामीण

गांव के निवासी सरवन प्रसाद ने बताया, ‘सुबह हम नदी में लकड़ियां निकालने गए थे. तभी अचानक पानी का स्तर तेजी से बढ़ने लगा. पहले हमने सोचा कि अपना सामान लेकर किसी सुरक्षित जगह चले जाएं. लेकिन तभी आसपास के गांवों से लोगों की चीख-पुकार सुनाई दी. जब वहां पहुंचे तो देखा कि लोग बेहद खतरनाक स्थिति में फंसे हुए हैं. उसी समय हमने फैसला किया कि अपना सामान छोड़कर पहले लोगों की जान बचाएंगे. अपनी नावों से हमने करीब 1,500 से 2,000 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला.’

सिस्टम पर उठाए सवाल

सरवन ने बताया कि दूसरों की जान बचाते समय उनकी अपनी स्थिति भी बेहद दयनीय थी. उन्होंने कहा, ‘हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं था और पीने का साफ पानी भी नहीं था. मजबूरी में हमें बाढ़ का पानी पीना पड़ा. कहीं से एक छोटे बर्तन में थोड़ा-सा चना मिला, उसी से हमने पेट भरा. आज तक कोई सरकारी अधिकारी हमारी सुध लेने नहीं आया. अगर समय पर मदद पहुंची होती तो शायद इतनी जानें नहीं जातीं.’

‘चारों तरफ पानी, रोते-बिलखते लोग’

गांव के एक अन्य निवासी ने उस भयावह मंजर को याद करते हुए बताया कि बाढ़ का पानी घरों की छतों से भी ऊपर पहुंच गया था. उन्होंने कहा,’हमारे घर पूरी तरह पानी में डूब गए थे. चारों ओर सिर्फ पानी ही पानी था. बच्चे और महिलाएं मदद के लिए रो रहे थे. पहले हमने अपने गांव के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. जब वे सुरक्षित हो गए, तब पड़ोसी गांवों से मदद की पुकार सुनकर वहां पहुंचे और लोगों को निकालना शुरू किया.’

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ग्रामीणों के अनुसार, उनके पास केवल छह छोटी नावें थीं. बावजूद इसके, गांव के लोगों ने एकजुट होकर पांच आसपास के गांवों में लगातार बचाव अभियान चलाया. जिन लोगों को बचाया गया, उन्हें उन पक्के मकानों में पहुंचाया गया जिनकी छतें बाढ़ के पानी से ऊपर थीं.

एक अन्य ग्रामीण ने बताया, ‘सिर्फ छह नावों और पूरे गांव के सामूहिक प्रयास से हम लगभग 1,500 से 2,000 लोगों को सुरक्षित बचाने में सफल रहे.’ असम की इस विनाशकारी बाढ़ के बीच नंबर-2 क्वारी गांव के लोगों का साहस, एकजुटता और निस्वार्थ सेवा मानवता की एक ऐसी मिसाल बनकर सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि सबसे कठिन और अंधेरे समय में भी इंसानियत की रोशनी सबसे अधिक चमकती है.

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