- भारत में लोकसभा सांसद बनने के लिए 25 वर्ष की आयु आवश्यक है.
- पाकिस्तान में नेशनल असेंबली के लिए 25 वर्ष, सीनेट के लिए 30 वर्ष.
- बांग्लादेश में भी संसद सदस्य के लिए न्यूनतम 25 वर्ष की आयु.
- वोट डालने की आयु 18, पर चुनाव लड़ने की आयु 25 वर्ष.
लोकतंत्र में जनता को अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार तो है ही, लेकिन खुद चुनाव मैदान में उतरने के लिए कुछ जरूरी कायदे और नियम बनाए गए हैं. भारत में लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए एक खास उम्र सीमा तय की गई है, जिसके बिना कोई भी नागरिक संसद पहुंचने का सपना नहीं देख सकता. दिलचस्पी की बात यह है कि जब बात हमारे पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश की आती है, तो वहां के नियम भी काफी हद तक भारत से मिलते-जुलते हैं. आइए जानते हैं कि इन तीनों देशों में सांसद बनने की न्यूनतम उम्र क्या है.
भारत में सांसद बनने की तय उम्र
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 84 (b) के मुताबिक, देश में लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए किसी भी उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 25 साल होनी जरूरी है. इसका मतलब यह हुआ कि यदि कोई भारतीय नागरिक संसद के निचले सदन यानी लोकसभा का सदस्य बनना चाहता है, तो उसे कम से कम 25 वर्ष की आयु पूरी करनी होगी. यही नियम राज्यों की विधानसभा चुनावों के लिए भी पूरी तरह लागू होता है, जहां विधायक बनने के लिए भी यही उम्र सीमा अनिवार्य की गई है.
पाकिस्तान में नेशनल असेंबली का चुनाव लड़ने का नियम
भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की बात करें तो वहां भी चुनावी मैदान में उतरने की उम्र सीमा भारत के समान ही रखी गई है. पाकिस्तान के निचले सदन को नेशनल असेंबली कहा जाता है. वहां के चुनावी नियमों के अनुसार, नेशनल असेंबली का चुनाव लड़ने के लिए किसी भी प्रत्याशी की न्यूनतम उम्र 25 वर्ष होना बेहद जरूरी है. हालांकि, वहां के उच्च सदन यानी सीनेट का सदस्य बनने के लिए उम्र का पैमाना अलग है, जिसके लिए उम्मीदवार को कम से कम 30 वर्ष का होना चाहिए.
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बांग्लादेश में भी यही है चुनावी पैमाना
एक और पड़ोसी देश बांग्लादेश के संविधान पर नजर डालें तो वहां भी संसद सदस्य बनने के लिए उम्र की यही सीमा देखने को मिलती है. बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 66 (1) के तहत, वहां की संसद (जातीय संसद) का चुनाव लड़ने के लिए किसी भी व्यक्ति का बांग्लादेशी नागरिक होना और न्यूनतम 25 वर्ष की आयु पूरी करना अनिवार्य है. इस तरह देखा जाए तो उपमहाद्वीप के इन तीनों प्रमुख देशों ने जनप्रतिनिधि बनने के लिए एक ही परिपक्वता स्तर को चुना है.
वोट डालने और चुनाव लड़ने में अंतर
अक्सर लोग मतदान करने की उम्र और चुनाव लड़ने की उम्र के बीच भ्रमित हो जाते हैं. भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश, तीनों ही देशों में वोट डालने यानी मतदाता बनने की कानूनी उम्र 18 साल तय की गई है. लेकिन देश की कमान संभालने या कानून बनाने वाली संस्था का हिस्सा बनने के लिए सिर्फ 18 साल की उम्र काफी नहीं होती. इसके लिए देश के नीति निर्माताओं ने सोच-समझकर 25 वर्ष की आयु को सबसे उपयुक्त और परिपक्व माना है.
उच्च सदनों के लिए बिल्कुल अलग हैं नियम
जहां भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में निचले सदन (जैसे भारत की लोकसभा) के लिए न्यूनतम उम्र 25 वर्ष है, वहीं उच्च सदन के नियम काफी अलग और कड़े हैं. भारत में उच्च सदन यानी राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए किसी भी नागरिक की उम्र कम से कम 30 वर्ष होनी चाहिए. ठीक इसी तरह पाकिस्तान में भी सीनेट के लिए 30 साल की उम्र जरूरी है. हालांकि, बांग्लादेश में एकसदनीय (Unicameral) संसद व्यवस्था है, इसलिए वहां केवल 25 साल का नियम ही प्रभावी है.
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