दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने कहा है कि ‘तोड़ी गई कॉलोनियों’ के वोटर्स 4 नवंबर को जारी होने वाली फाइल वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवाने के लिए फॉर्म आठ भरकर जानकारी दे सकते हैं. मंगलवार (8 सितंबर) को ‘वोटर अधिकार मंच’ के एक ज्ञापन के जवाब में दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने कहा कि निर्वाचन आयोग के मौजूदा निर्देशों के अनुसार वोटर्स सूची में दर्ज पते पर रहने वाले वोटर्स को इम्यूरेशन फॉर्म बांटे जाने चाहिए.
अधिकारियों ने बताया कि हाल के महीनों में नगर निकाय द्वारा अतिक्रमण विरोधी अभियानों और अदालत के निर्देशों पर की गई अन्य कार्रवाइयों के दौरान कई मकानों को ध्वस्त कर दिया गया था. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 19 के अनुसार, वोटर्स सूची में नाम शामिल किए जाने की जरूरी शर्तों में से एक शर्त यह है कि व्यक्ति उस चुनाव क्षेत्र का ‘सामान्य निवासी’ हो.
30 जून से 17 अगस्त तक बांटे गए थे इम्यूरेशन फॉर्म
सीईओ कार्यालय ने कहा, यदि कोई व्यक्ति किसी भी कारण से उस निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी नहीं रह गया है, तो वह पता बदलने के लिए फॉर्म-8 के माध्यम से आवेदन कर सकता है. फॉर्म-8 मिलने पर, वोटर का नाम नई जगह पर जुड़ने के बाद ही पुरानी जगह के पते वाली वोटर्स सूची से हटाया जाता है.’ दिल्ली में 30 जून से 17 अगस्त तक घर-घर जाकर किए गए सर्वेक्षण के दौरान 1.45 करोड़ वोटर्स को इम्यूरेशन फॉर्म बांटे गए थे.
जिन वोटर्स से बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर सर्वेक्षण के अभियान के दौरान भरे हुए प्रपत्र प्राप्त नहीं कर सके, उन्हें बीएलओ ने अनुपस्थित/वोटर्स का पता नहीं चला, पंजीकृत पते से किसी अन्य स्थान पर चले गए, मृत, पहले से कहीं और वोटर्स के रूप में पंजीकृत अथवा एएसडीडी यानी अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत/डुप्लीकेट वोटर्स के रूप में चिह्नित किया था.
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18 अगस्त को प्रकाशित वोटर्स सूची में 47.5 लाख नाम शामिल नहीं
राजधानी में वोटर्स सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 18 अगस्त को प्रकाशित मसौदा वोटर्स सूची में ऐसे करीब 47.5 लाख वोटर्स के नाम शामिल नहीं किए गए. दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने कहा कि गणना चरण के दौरान बीएलओ ने एएसडीडी वोटर्स की सूची संबंधित मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ स्तर के एजेंट (बीएलए) के साथ विधिवत साझा की थी.
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