Headlines

महाराष्ट्र: आदिवासी छात्रों से मिलेंगे राहुल गांधी, आश्रमशालाओं में मौतों पर सवाल


महाराष्ट्र की शासकीय और अनुदानित आश्रमशालाओं में पढ़ने वाले आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. आदिवासी आयुक्तालय से मिले आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 20 सालों में इन आश्रमशालाओं में 2,319 विद्यार्थियों की मौत हुई है. इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज इन आश्रमशालाओं के विद्यार्थियों से मुलाकात करेंगे.

आंकड़ों के मुताबिक, 20 सालों के दौरान हुई 2,319 मौतों में करीब 65 फीसदी मामले शासकीय आश्रमशालाओं के हैं, जबकि करीब 34 फीसदी मौतें अनुदानित आश्रमशालाओं में हुई हैं. सबसे ज्यादा मौतें नासिक विभाग में दर्ज की गई हैं. यहां कुल मौतों का करीब 44 फीसदी हिस्सा सामने आया है.

इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की मौत ने आश्रमशालाओं में बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और रहने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. खास तौर पर तब जब ये संस्थान आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा और रहने की मुख्य व्यवस्था माने जाते हैं.

दिशा सालियान मौत मामले होगी CBI जांच, बॉम्बे HC का बड़ा आदेश

करोड़ों का बजट, फिर भी सुविधाओं की कमी

राज्य सरकार आश्रमशालाओं पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है. साल 2025-26 के बजट में शासकीय आश्रमशालाओं के लिए करीब 2,207 करोड़ रुपये और अनुदानित आश्रमशालाओं के लिए करीब 950 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

इसके बावजूद कई आश्रमशालाओं में भवन, हॉस्टल और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं. कुछ जगहों पर जिस इमारत में कक्षाएं चलती हैं, वहीं विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था होने की बात सामने आई है. बिजली के तारों को कील, स्क्रू और क्लैम्प के सहारे जोड़ने जैसी असुरक्षित व्यवस्थाएं भी चिंता बढ़ाती हैं.

साल 2024 से 2026 के बीच 584 मौतें

हाल के आंकड़े भी स्थिति को लेकर चिंता बढ़ाते हैं. साल 2024 से 2026 के दौरान सरकारी आश्रमशालाओं में 384, जबकि अनुदानित आश्रमशालाओं में 200 विद्यार्थियों की मौत दर्ज की गई. यानी केवल इस अवधि में कुल 584 विद्यार्थियों की जान गई.

प्रशासन की ओर से कुछ मामलों में कार्रवाई भी की गई है. साल 2012 तक सामने आए 793 मौत के मामलों में 74 कर्मचारियों को निलंबित किया गया. वहीं 28 मामलों में विभागीय जांच, 39 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस और 99 कर्मचारियों को मेमो जारी किए गए. साल 2016 में सालुखे समिति बनाई गई थी, जिसने विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर 27 सिफारिशें की थीं.

ज्यादातर मौतें स्कूल के बाहर- सरकार का दावा

आदिवासी विभाग के सचिव विजय वाघमारे का कहना है कि आश्रमशालाएं आवासीय विद्यालय हैं और यहां पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे बेहद गरीब परिवारों से आते हैं. विभाग के मुताबिक, करीब 92 फीसदी विद्यार्थियों के माता-पिता गरीबी रेखा से नीचे हैं.

सरकार का दावा है कि करीब 88 फीसदी मौतें उस समय हुईं, जब बच्चे अपने माता-पिता के पास थे, जबकि लगभग 11 फीसदी मौतें स्कूल परिसर में हुईं. विभाग का कहना है कि छुट्टियों के दौरान भी बच्चों की सुरक्षा और देखभाल पर ध्यान दिया जाता है.

अनुदानित आश्रमशालाओं पर भी उठे सवाल

राज्य में 556 अनुदानित आश्रमशालाएं संचालित हैं. इनके संचालन और बजट के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं. आरोप है कि कई संस्थाएं राजनीतिक प्रभाव रखने वाले लोगों से जुड़ी हैं और बजट का बड़ा हिस्सा इन्हीं संस्थाओं तक पहुंचता है.

ठाणे: मरीज की थाली में कॉकरोच! MNS कार्यकर्ताओं का अस्पताल में बवाल

अब बड़ा सवाल यही है कि जब सरकार इन आश्रमशालाओं पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है, तो वहां रहने वाले आदिवासी विद्यार्थियों को सुरक्षित भवन, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षित माहौल क्यों नहीं मिल पा रहा है. राहुल गांधी की आज होने वाली मुलाकात के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में आ सकता है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *