उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तैयारियां तेज हो गई हैं. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद बीजेपी की राजनीति में सांस्कृतिक विरासत और आस्था का मुद्दा बड़े नैरेटिव के तौर पर सामने रहा है. अब सियासी चर्चा मथुरा और श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर तेज हो गई है. सवाल उठ रहा है कि क्या 2027 के चुनावी रण में अयोध्या के बाद मथुरा बीजेपी का अगला बड़ा सांस्कृतिक मुद्दा बन सकता है?
इस चर्चा के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 3 और 4 सितंबर का मथुरा-वृंदावन दौरा खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है. प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक, मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण जन्मभूमि पहुंचकर दर्शन-पूजन करेंगे. ऐसे में मुख्यमंत्री का मथुरा दौरा सिर्फ धार्मिक नजरिए से ही नहीं, बल्कि सियासी नजरिए से भी देखा जा रहा है.
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योगी के भाषणों में लगातार कृष्ण और ब्रज का जिक्र
पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषणों में ब्रज क्षेत्र, भगवान श्रीकृष्ण और सांस्कृतिक विरासत का जिक्र लगातार सुनाई दे रहा है. मुख्यमंत्री विपक्ष से श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग भी कर चुके हैं. ऐसे में सवाल यह है कि जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा के मंच से मुख्यमंत्री का क्या संदेश निकलता है. यानी अयोध्या में राम मंदिर के बाद अब सियासी नजर मथुरा पर है. बीजेपी के लिए राम के बाद कृष्ण का मुद्दा 2027 के चुनाव में सांस्कृतिक और धार्मिक नैरेटिव को आगे बढ़ाने का जरिया बन सकता है.
दो दिन मथुरा-वृंदावन में रहेंगे योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 3 और 4 सितंबर को मथुरा-वृंदावन के दौरे पर रहेंगे. पहले दिन मुख्यमंत्री वृंदावन में ब्रज तीर्थ विकास परिषद की समीक्षा बैठक करेंगे. इसके बाद विकास परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम होंगे और बांके बिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन का कार्यक्रम प्रस्तावित है. दूसरे दिन, यानी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण जन्मभूमि पहुंचकर दर्शन-पूजन करेंगे. इस दौरान मथुरा-वृंदावन के लिए करीब 446 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात भी प्रस्तावित है.
बीजेपी ने उठाए सपा पर सवाल
मुख्यमंत्री के दौरे के बीच बीजेपी नेताओं ने समाजवादी पार्टी पर भी सवाल खड़े किए हैं. बीजेपी नेताओं का कहना है कि राम और कृष्ण हमेशा से उनकी आस्था के केंद्र रहे हैं. पार्टी का दावा है कि वह आस्था के इन केंद्रों के विकास से लेकर मंदिर निर्माण तक की लड़ाई और संघर्ष करती रही है. बीजेपी नेता सपा नेताओं से यह भी सवाल कर रहे हैं कि वे श्रीकृष्ण जन्मभूमि के दर्शन करने कब जाएंगे.
वहीं समाजवादी पार्टी का कहना है कि हर व्यक्ति की अपनी आस्था है और सपा नेताओं की भी भगवान राम और कृष्ण में आस्था है. पार्टी का कहना है कि उसके नेता अलग-अलग समय पर मंदिरों में जाते रहे हैं, लेकिन किसी के दबाव में कहीं नहीं जाएंगे. सपा का आरोप है कि बीजेपी के पास अब विकास के मुद्दे पर कहने के लिए कुछ नहीं बचा है, इसलिए वह धर्म और आस्था के मुद्दों को चुनावी राजनीति के केंद्र में ला रही है.
2027 में मथुरा बनेगा बड़ा सियासी मुद्दा?
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद यूपी की राजनीति में सांस्कृतिक मुद्दों का प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है. अब मथुरा और श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी ने 2027 के चुनाव से पहले नई बहस छेड़ दी है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है क्या अयोध्या के बाद मथुरा बीजेपी के 2027 के चुनावी नैरेटिव का अगला बड़ा केंद्र बनने जा रहा है?
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