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योगी सरकार में डिजिटल तकनीक से पारदर्शी बनीं पोषण योजनाएं, पात्रों तक सीधे पहुंच रहा पूरा लाभ


उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने आंगनबाड़ी और पोषण योजनाओं को तकनीक से जोड़कर नई पहचान दी है. लाभार्थियों का पंजीकरण और निगरानी पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जा रही है, जिससे योजनाओं में पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ी है. बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन ने योगी सरकार की ओर से लागू की गई पोषण ट्रैकर प्रणाली ने आंगनबाड़ी व्यवस्था को आधुनिक और जवाबदेह बनाया है.

योगी सरकार में आसान हुई योजनाओं की निगरानी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उद्देश्य पोषण सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंचाना है. तकनीक आधारित व्यवस्थाओं के कारण वर्तमान समय में योजनाओं की निगरानी आसान हुई है और समयबद्ध तरीके से लाभार्थियों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं.

‘डिजिटल मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण’

प्रदेश में लागू डिजिटल मॉडल को अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है. वहीं इस पहल से लाखों महिलाओं और बच्चों को बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण का लाभ मिल रहा है.

98.76 प्रतिशत लाभार्थियों का पंजीकरण पूरा

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फेस रिकग्निशन सिस्टम के जरिए प्रदेश में 98.76 प्रतिशत लाभार्थियों का पंजीकरण पूरा किया जा चुका है. यह व्यवस्था लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रही है. इससे फर्जी नामों और गलत लाभार्थियों की प्रविष्टियों पर प्रभावी रोक लगी है. योजनाओं का लाभ सीधे वास्तविक पात्र महिलाओं और बच्चों तक पहुंच रहा है.

‘डिजिटल रिकॉर्डिंग के कारण सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार’

पोषण ट्रैकर प्रणाली के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध हो रहा है. वहीं योजनाओं की निगरानी करने और समय-समय पर समीक्षा करने में आसानी हो रही है. डिजिटल रिकॉर्डिंग के कारण सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला है.



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