राज्यसभा में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय से पेट्रोल ब्लेंडिंग प्रभाव, मूल्य, खरीद और उपभोक्ता विकल्प को लेकर सवाल पूछा गया. सांसद अशोक सिंह ने पूछा कि क्या सरकार 20% से अधिक एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने का प्रस्ताव रखती है? इसका जवाब देते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय में राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि फिलहाल सरकार ने पेट्रोल में 20% से अधिक एथेनॉल मिश्रण (E20) बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया है.
भविष्य में यदि इस दिशा में कोई फैसला लिया जाता है, तो वह विस्तृत वैज्ञानिक एवं तकनीकी अध्ययन तथा ऑटोमोबाइल निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और अनुसंधान संस्थानों सहित सभी संबंधित पक्षों से परामर्श के बाद ही लिया जाएगा.
इसके अलावा सांसद ने पूछा कि क्या E20 का गैर-E20 अनुकूल वाहनों पर प्रभाव का अध्ययन किया गया है? मंत्री ने बताया कि सरकार ने कहा कि E20 कोई नया ईंधन नहीं है. भारत में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम 2001 में पायलट परियोजना के रूप में शुरू हुआ था और एथेनॉल मिश्रण को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया है.
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एथेनॉल मिश्रण की प्रगति
एथेनॉल आपूर्ति वर्ष औसत मिश्रण (%)
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2013-14 1.53%
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2020-21 8.1%
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2021-22 10%
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2022-23 12%
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2023-24 14.6%
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2024-25 19.2%
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2025-26 (नवंबर-जून) 20%
मिश्रण स्तर बढ़ाने से पहले नीति आयोग, ARAI, SIAM, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (IIP), तेल विपणन कंपनियों और वाहन निर्माताओं के साथ मिलकर प्रयोगशाला परीक्षण, टिकाऊपन परीक्षण, फील्ड ट्रायल और वाहन प्रदर्शन, उत्सर्जन, ईंधन दक्षता, इंजन टिकाऊपन, जंग प्रतिरोध आदि पर व्यापक अध्ययन किए गए.
सरकार के अनुसार
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पिछले 3.5 वर्षों से E15+ तथा 2.5 वर्षों से E19-E20 ईंधन का व्यापक उपयोग हो रहा है.
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20 करोड़ से अधिक दोपहिया और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें, जिनमें कई पुराने गैर-E20 प्रमाणित वाहन भी शामिल हैं, इन ईंधनों पर चल रही हैं.
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अब तक E20 के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहन क्षति का कोई सत्यापित प्रमाण नहीं मिला है.
एक प्रमुख कार निर्माता ने FY 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग के दौरान E20 से संबंधित कोई नुकसान दर्ज नहीं किया. इसी तरह एक प्रमुख दोपहिया निर्माता ने भी E20 के कारण अतिरिक्त क्षति की पुष्टि नहीं की.
माइलेज पर प्रभाव
सरकार के अनुसार माइलेज मुख्यतः ड्राइविंग शैली, टायर प्रेशर, सर्विसिंग और एसी उपयोग पर निर्भर करता है. पुराने E10 डिज़ाइन वाले कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता में लगभग 3–5% तक कमी हो सकती है, लेकिन E20 का ऑक्टेन स्तर अधिक होने से बेहतर दहन, एंटी-नॉक क्षमता और स्मूद इंजन संचालन मिलता है.
(ग) पिछले तीन वर्षों में एथेनॉल की खरीद और उसका मूल्य
PSU तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL और HPCL) द्वारा खरीदे गए एथेनॉल का विवरण:
(एथेनॉल आपूर्ति वर्ष खरीदी गई मात्रा (करोड़ लीटर) खरीद मूल्य (₹ करोड़))
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2023-24 679.04 48,757.01
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2024-25 1033.31 73,996.48
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2025-26 (जून 2026 तक) 705.43 49,577.36
वर्तमान में PSU OMCs के साथ 501 एथेनॉल आपूर्तिकर्ता पंजीकृत हैं. कंपनीवार भुगतान का विवरण उत्तर में उपलब्ध नहीं कराया गया.
इसके साथ सांसद ने पूछा कि क्या गैर-ब्लेंडेड या कम एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपलब्ध कराने की योजना है?
मंत्री ने जानकारी दी कि सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है कि चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर गैर-ब्लेंडेड या कम एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए.
सरकार का कहना है कि:
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राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के तहत देश को स्वच्छ, तकनीकी रूप से बेहतर और पर्यावरण-अनुकूल ईंधन की ओर ले जाना लक्ष्य है.
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E20 की ओर संक्रमण वैज्ञानिक परीक्षणों और चरणबद्ध तरीके से किया गया है.
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कम मिश्रण वाले पेट्रोल की समानांतर आपूर्ति व्यवस्था से लॉजिस्टिक्स जटिल होंगे और लागत बढ़ेगी.
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इससे पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा और किसानों को मिलने वाले लाभ भी प्रभावित होंगे.
इसलिए सरकार का उद्देश्य वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित E20 ईंधन को आगे बढ़ाना है, न कि कम एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल की ओर वापस जाना.
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