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दिल्ली: मकान में आग लगने से पूर्व IAS धनेंद्र कुमार की मौत, कई मंत्रालयों में रहे सचिव


दिल्ली के हौज खास इलाके में बुधवार (27 मई) देर रात एक मकान में आग लगने से रिटायर्ड IAS अधिकारी धनेंद्र कुमार की मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक रात करीब 11:18 बजे R-15 हौज खास स्थित घर में आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची. शुरुआती जांच में पता चला है कि एसी के इंडोर यूनिट में ब्लास्ट होने से आग लगी. हादसे में धनेंद्र कुमार और उनके बेटे को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान धनेंद्र कुमार ने दम तोड़ दिया. 

घर में उस वक्त परिवार के सदस्य और घरेलू सहायकों समेत कुल पांच लोग मौजूद थे. फिलहाल पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम मामले की जांच कर रही है, जबकि अभी तक किसी साजिश की आशंका नहीं जताई गई है.

सीनियर IAS अधिकारी धनेंद्र कुमार का लंबा प्रशासनिक सफर

भारत की नौकरशाही और आर्थिक नीतियों में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ IAS अधिकारी का प्रशासनिक करियर बेहद लंबा और प्रभावशाली रहा है. साल 1946 में जन्मे धनेंद्र कुमार ने 1968 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS अधिकारी के तौर पर अपनी सेवा शुरू की थी. अपने करियर के दौरान उन्होंने केंद्र और हरियाणा सरकार में कई बड़े पदों पर काम किया और बाद में देश के प्रतिस्पर्धा कानून और आर्थिक सुधारों से जुड़े अहम फैसलों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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कई अहम मंत्रालयों में रहे सचिव

धनेंद्र कुमार ने केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों में सचिव के तौर पर जिम्मेदारी संभाली. इनमें रक्षा मंत्रालय, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय शामिल हैं. रक्षा मंत्रालय में सचिव रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक मामलों को संभाला, जबकि सड़क परिवहन मंत्रालय में रहते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर और हाईवे प्रोजेक्ट्स से जुड़े मामलों पर काम किया.

संस्कृति मंत्रालय में सचिव के रूप में उन्होंने देश की सांस्कृतिक विरासत और संस्थानों से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी निभाई. इसके अलावा वे ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (Rural Electrification Corporation) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भी रहे.

वर्ल्ड बैंक में भी निभाई बड़ी जिम्मेदारी

धनेंद्र कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का प्रतिनिधित्व किया. नवंबर 2005 से जनवरी 2009 तक वे भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहे. इस दौरान उन्होंने दक्षिण एशियाई देशों से जुड़े आर्थिक और विकास परियोजनाओं पर काम किया.

CCI की भूमिका को मजबूत किया

फरवरी 2009 से जून 2011 तक धनेंद्र कुमार CCI के चेयरमैन रहे. उनके कार्यकाल के दौरान भारत में प्रतिस्पर्धा कानून को लागू करने की दिशा में कई अहम कदम उठाए गए. बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और बड़ी कंपनियों के एकाधिकार पर नजर रखने के लिए CCI (Competition Commission of India) की भूमिका को मजबूत किया गया.

राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा नीति बनाने में अहम भूमिका

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा नीति यानी National Competition Policy तैयार करने के लिए भी धनेंद्र कुमार की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी. इस कमेटी का काम प्रतिस्पर्धा कानून में सुधार और नई नीतियों को तैयार करना था.
 इसके अलावा आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए भी उनकी अध्यक्षता में SAPREP कमेटी का गठन किया था.

हरियाणा में औद्योगिक विकास में बड़ा योगदान

धनेंद्र कुमार ने हरियाणा सरकार में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं. वे हरियाणा के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रहे, साथ ही हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी HSIIDC के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भी रहे. हरियाणा में इंडस्ट्रियल पार्क्स के विकास में योगदान के लिए उन्हें नेशनल सिटिजन्स अवॉर्ड भी दिया गया था. सार्वजनिक मामलों में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी मिली.

हरियाणा से दिल्ली तक का लंबा प्रशासनिक सफर

अपने शुरुआती प्रशासनिक करियर में धनेंद्र कुमार हरियाणा के कई जिलों में जिला कलेक्टर और अन्य प्रशासनिक पदों पर रहे. वे करनाल और जींद के डिप्टी कमिश्नर रहे. इसके अलावा लेबर कमिश्नर, रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटीज, डायरेक्टर ऑफ इंडस्ट्रीज और कई अन्य अहम पदों पर भी उन्होंने काम किया.
 उन्होंने लंदन स्थित इंडियन इन्वेस्टमेंट सेंटर में रेजिडेंट डायरेक्टर के तौर पर भी जिम्मेदारी निभाई. इसके अलावा कृषि मंत्रालय, वस्त्र मंत्रालय और संचार मंत्रालय में भी उन्होंने वरिष्ठ पदों पर काम किया.

मीडिया और नीति मामलों में सक्रिय भूमिका

रिटायरमेंट के बाद भी धनेंद्र कुमार सार्वजनिक नीति और कॉरपोरेट मामलों में सक्रिय रहे. वे Competition Advisory Services India LLP यानी COMPAD के संस्थापक चेयरमैन हैं. इसके साथ ही वे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स में स्कूल ऑफ कॉम्पिटिशन लॉ  के प्रिंसिपल एडवाइजर और चीफ मेंटर के तौर पर भी जुड़े रहे.

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