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मशहूर शायर बशीर बद्र के निधन पर CM मोहन यादव ने जताया शोक, बोले- ‘शायरी से जिंदगी को आसान…’


मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जाने माने शायर डॉ. बशीर बद्र के निधन पर शोक जताया है. सीएम ने कहा कि उन्होंने अपनी शायरी से जिंदगी को बेहद आसान बनाने के सूत्र दिए. 91 साल की उम्र में बशीर बद्र का गुरुवार (28 मई) को दोपहर भोपाल में निधन हो गया. 

सीएम मोहन यादव ने शोक जताते हुए एक्स पोस्ट पर लिखा, ”पद्म श्री से सम्मानित, प्रसिद्ध शायर डॉ. बशीर बद्र जी के निधन पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं. उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन को संवेदनशीलता, अपनत्व और मानवता के साथ जीने का संदेश दिया. अपनी शायरी से जिंदगी को बेहद आसान बनाने के सूत्र दिए. ईश्वर दिवंगत को शांति और परिजनों व प्रशंसकों को यह दु:ख सहने की शक्ति दें.”

बशीर बद्र ने भोपाल में अपने घर पर ली अंतिम सांस

‘उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए’ जैसे शेर लिखने वाले बशीर बद्र का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार को भोपाल में निधन हो गया. दिग्गज कवि ने भोपाल में अपने घर पर अंतिम सांस ली. 

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1935 में अयोध्या में हुआ था जन्म

यूपी के अयोध्या में 15 फरवरी 1935 को जन्मे बद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में उर्दू के शिक्षक के तौर पर काम किया. वह भाषा पर अपनी पकड़, खासकर गजलों में महारत के लिए विख्यात थे. वह फारसी, हिंदी और अंग्रेजी के भी जानकार थे. उनका असल नाम सय्यद मुहम्मद बशीर था. बद्र की 69 गजलों का संग्रह ‘आस’ को उनकी चर्चित कृतियों में गिना जाता है. उनका एक अन्य संग्रह, जिसका शीर्षक ‘कुल्लियते बशीर बद्र’ है, पाकिस्तान में प्रकाशित हो चुका है. 

बशीर बद्र की गजलों में संवेदना की सतह पर ताजगी

ऐसा माना जाता है कि उन्होंने 7 साल की कम उम्र में कविता लिखना शुरू कर दिया था. बद्र साहब को समर्पित एक वेबसाइट के मुताबिक वह अपने कई गीतों में उर्दू की कोमलता को अंग्रेजी उच्चारण में घोल देने में अग्रणी थे. जानकारों के मुताबिक बशीर बद्र की गजलों में शब्द और संवेदना की सतह पर ताजगी, काव्यात्मकता और सौंदर्य हुआ करते थे, जो उन्हें दूसरे शायरों से अलग करती थी. उन्होंने उर्दू में सात से अधिक कविता संग्रह और हिंदी में एक कविता संग्रह प्रकाशित किया.

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