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EXCLUSIVE: ABP से बोले वैभव के बचपन के कोच मनीष ओझा, कहा- 90 ओवर टिक गया तो…


भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी अब टी20 क्रिकेट के साथ-साथ रेड बॉल क्रिकेट में भी अपनी छाप छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं. दिलीप ट्रॉफी में चयन के बाद वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बल्लेबाजी को चार और पांच दिन के क्रिकेट के मुताबिक ढालने के लिए खास तैयारी शुरू कर दी है. इसी सिलसिले में उन्होंने अपने बचपन के कोच मनीष ओझा को नागपुर स्थित राजस्थान रॉयल्स की एकेडमी में बुलाया, जहां ओझा ने करीब छह दिनों तक वैभव को ट्रेनिंग दी.

मनीष ओझा ने ABP News के साथ खास बातचीत में वैभव सूर्यवंशी की तैयारियों, उनकी बल्लेबाजी में किए जा रहे बदलाव और रेड बॉल क्रिकेट में उनकी संभावनाओं को लेकर कई अहम बातें साझा कीं.

सवाल: मनीष जी, आपको नागपुर में वैभव सूर्यवंशी को ट्रेनिंग देने के लिए बुलाया गया. आपको किस वजह से बुलाया गया था?

मनीष ओझा: वैभव सूर्यवंशी टी20 के स्टार खिलाड़ी हैं. टी20 में उनका एक अलग रौब है, लेकिन अब भारतीय टीम मैनेजमेंट उनको रेड बॉल क्रिकेट की तरफ भी देख रहा है. इसी वजह से उनका चयन दिलीप ट्रॉफी की टीम में हुआ है और उनको इस जोन का उपकप्तान भी बनाया गया है. जब वैभव ने मुझे बुलाया तो उनका जोर इसी बात पर था कि रेड बॉल यानी फोर-डे और फाइव-डे क्रिकेट में किस तरह की बल्लेबाजी जरूरी होती है. उसी हिसाब से मैंने उनकी प्रैक्टिस करवाई.

सवाल: आपको वैभव सूर्यवंशी ने बुलाया था या राजस्थान रॉयल्स की तरफ से आपको कॉल किया गया था?

मनीष ओझा: नहीं, मुझे वैभव सूर्यवंशी ने ही कॉल किया था. वैभव ने ही मुझे बुलाया था. उनकी डिमांड थी कि जो उनके बचपन के कोच मनीष ओझा जी हैं, उनको पटना से बुलाया जाए. मुझे वहाँ बुलाया गया और फिर मैंने जाकर वैभव को प्रैक्टिस करवाई.

इसका एक रीजन ये भी था कि वैभव मेरे साथ काफी सहज हैं. मेरे साथ उनका काफी कम्फर्ट रहता है. जो बचपन का कोच होता है, उसके साथ एक अलग कम्फर्ट होता है. वह खिलाड़ी की वीकनेस और उसकी स्ट्रेंथ को अच्छी तरह जानता है. मैंने वैभव के साथ कई सालों तक काम किया है, इसलिए वैभव का मेरे साथ एक अलग कम्फर्ट जोन है. इसी वजह से उन्होंने मुझे बुलाया.

सवाल: इस बार वैभव सूर्यवंशी के लिए जो ट्रेनिंग सेशन ऑर्गनाइज किया गया था, उसमें किन चीजों का खास ध्यान रखा गया?

मनीष ओझा: सबसे पहले इस बात पर ध्यान दिया गया कि सेशन टू सेशन बल्लेबाजी कैसे करनी है. यानी लंच से पहले कैसे बल्लेबाजी करनी है, लंच के बाद टी तक किस तरह बल्लेबाजी करनी है और टी के बाद जो आखिरी सेशन होता है, उसमें कैसे बल्लेबाजी करनी है. इन सभी सेशन्स में सेशन टू सेशन कैसे बल्लेबाजी करनी है, इसके लिए वैभव को मेंटली प्रिपेयर करवाया गया.

इसके अलावा इस बात पर भी ध्यान दिया गया कि जो गुड बॉल्स हैं, यानी अच्छी गेंदें हैं, उनको रिस्पेक्ट देना है और जो लूज बॉल्स हैं, उन पर हिट करना है. रन भी उन्हीं गेंदों पर बनाने हैं. एक समय ऐसा भी आया जब वैभव थोड़े कॉन्शियस हो गए थे. तब उनको बताया गया कि रेड बॉल क्रिकेट का मतलब ये नहीं है कि हमें अपने शॉट्स नहीं खेलने हैं. अपने शॉट्स खेलने हैं, लेकिन कमजोर गेंदों पर शॉट्स खेलने हैं. जो अच्छी गेंद है, उसका सम्मान करना है और जरूरत पड़ने पर उसको लीव भी करना है.

सबसे बड़ी चीज लॉन्जिविटी है. यानी आप लंबे समय तक कैसे बल्लेबाजी कर सकते हैं. उसके लिए मेंटली प्रिपेयर होना बहुत जरूरी है. हमने वैभव को इसी तरह तैयार किया कि वह सेशन टू सेशन बल्लेबाजी करें और 90 ओवर तक बल्लेबाजी करने की मानसिकता रखें.

सवाल: जब वैभव आपकी एकेडमी में थे और अब इंटरनेशनल प्लेयर बन चुके हैं, तो आपको उनके अंदर क्या बदलाव देखने को मिला?

मनीष ओझा: मुझे भी लग रहा था कि शायद उनके अंदर चेंज आएगा. लेकिन देखिए, जिम्बाब्वे में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनने के बाद भी वैभव सूर्यवंशी हैं तो बच्चे ही. उनकी उम्र अभी ज्यादा नहीं है. वह 15 साल के हैं. तो जो 15 साल का बच्चा होता है, वह वैसा ही बच्चा है.

बेशक वह जिम्बाब्वे में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बन गए हों, बेशक उन्होंने इंडिया के लिए डेब्यू कर लिया हो, लेकिन अभी भी वह बच्चे ही हैं. बच्चे को बच्चे की तरह ही समझाना पड़ता है और उसकी उम्र के हिसाब से ही उसको गाइड करना पड़ता है. वैभव से मिलकर अभी ऐसा नहीं लगा कि वह कोई बहुत बड़े स्टार बन चुके हैं. ऐसा लगा कि वह वही बच्चा है, जो मेरी एकेडमी में आकर ट्रेनिंग किया करता था.

सवाल: दिलीप ट्रॉफी में वैभव सूर्यवंशी से क्या उम्मीद की जा सकती है? हमने उन्हें टी20 क्रिकेट में देखा है. आईपीएल में वह शतक भी लगा चुके हैं. क्या दिलीप ट्रॉफी में उनके बल्ले से कोई बड़ी पारी देखने को मिल सकती है? क्या दोहरा शतक भी आ सकता है?

मनीष ओझा: आप दोहरे शतक की बात कर रहे हो, मैं तो कह रहा हूं कि अगर वैभव सूर्यवंशी 90 ओवर टिक गया, तो वह तिहरा शतक भी लगा सकता है. उस खिलाड़ी के अंदर ये ताकत है, उस खिलाड़ी के अंदर ये टैलेंट है कि वह दिलीप ट्रॉफी में तिहरा शतक भी लगा सकता है, इस उम्र में.

लेकिन जैसा हमने वैभव को बताया है कि पेशेंस भी रखना है. हर गेंद पर आप उड़ा नहीं सकते, क्योंकि ये टी20 क्रिकेट नहीं है. गेंदबाजों का सम्मान करना भी जरूरी है. अच्छी गेंदों का सम्मान करें और जो लूज गेंद है, उस पर ही अपने शॉट्स लगाएं.

सवाल: वैभव सूर्यवंशी इंग्लैंड गए, जिम्बाब्वे गए. उन्होंने आपके लिए वहां से कोई खास गिफ्ट लाया?

मनीष ओझा: देखिए, गुरु के लिए सबसे बड़ा गिफ्ट यही होता है कि उसका जो सिखाया हुआ खिलाड़ी है, उसका जो सिखाया हुआ एथलीट है, वह जाकर इंटरनेशनल लेवल पर देश का नाम रोशन करे.
वैभव सूर्यवंशी जिम्बाब्वे दौरे पर प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने. इससे बड़ा गिफ्ट मेरे लिए क्या हो सकता है? गुरु के लिए इससे बड़ी खुशी और क्या होगी कि उसका शिष्य इंटरनेशनल लेवल पर जाकर देश का नाम रोशन करे.



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