नेपाल में आई त्रासदी से भारत के लोग भी प्रभावित हुए हैं. सियासी दलों के नेता इस त्रासदी पर दुख जताते हुए पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं और सरकार से राहत कार्यों में तेजी लाने की अपील भी की जा रही है. इसी क्रम में उद्धव गुट के सांसद संजय राउत ने भी कहा है कि नेपाल और भारत के बीच सालों से धार्मिक और राजनीतिक रिश्ते हैं, ऐसे में भारत का कर्तव्य बनता है कि वो नेपाल की मदद करे.
नेपाल एक जमाने का हिंदूराष्ट्र है- राउत
क्या भारत को नेपाल की मदद करनी चाहिए, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ”क्यों नहीं करनी चाहिए. नेपाल में हाहाकार मचा है. वो एक जमाने का हिंदूराष्ट्र है, वहां से हमारी भी श्रद्धाएं जुड़ी हैं. वहां मंदिर हैं, कैलाश मानसरोवर है, भारत के लोग वहां जाते हैं. इस बाढ़ की तबाही में हिंदुस्तान के लोग भी फंस गए हैं, कई लोग लापता हैं. महाराष्ट्र के 60 से ज्यादा लोग लापता हैं. वहां जिस तरह से तबाही हुई है, मुझे लगता है कि भारत सरकार को सभी लोगों को बचाने के लिए नेपाल की सहायता करनी चाहिए.”
नेपाल बाढ़ अपडेट
- मौत- 538
- घायल और बचाए गए लोग- 3742
- लापता/जिनसे सम्पर्क नहीं पाया है- 2381
- बचाव कार्यों में तैनात पुलिसकर्मी- 4473
- अब तक घायल- 73
नेपाल में तबाही चीन की वजह से मची है- संजय राउत
संजय राउत ने आगे कहा, ”ये जो तबाही मची है वो चीन की वजह से मची है. अगर चीन चाहता तो ये तबाही रोक सकता था. नेपाल और भारत के बीच सालों साल से आध्यात्मिक, धार्मिक और राजनीतिक रिश्ते हैं. ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि हम उसकी मदद करें.”
विकास के नाम पर प्रकृति को खत्म करने का नतीजा- संजय राउत
उन्होंने बताया कि इस तरह की घटनाएं भारत में उत्तराखंड, हिमाचल में भी हुई हैं. जिस तरह से हम विकास के नाम पर प्रकृति को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं, उसी का ये परिणाम है. अभी मैंने सुना है कि अयोध्या में सरयू नदी के तट पर फाइव स्टार होटल बन रहे हैं. प्रकृति का संरक्षण कौन करेगा? प्रकृति आपको जवाब देगी, नेपाल में भी यही हुआ है.
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