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ईरान युद्ध पर ट्रंप का बड़ा दावा, क्या 9 सितंबर से पहले होगा एक और हमला?


Iran War Prediction: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि ईरान के खिलाफ दोबारा शुरू हुआ सैन्य अभियान ज्यादा लंबा नहीं चलेगा. मगर इसके साथ उन्होंने चेतावनी भी दी है. जरूरत पड़ी तो अमेरिका फिर हमला कर सकता है.

यही दो बातें सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं. क्या युद्ध की आग अब शांत होगी या 9 सितंबर से पहले ईरान पर एक और हमला हो सकता है?

ईरान की कुंडली, वर्षफल और अगले छह दिनों का पंचांग देखें तो खतरा अभी टला नहीं है. खास तौर पर 6 और 8 सितंबर अधिक संवेदनशील दिखाई दे रहे हैं. हालांकि इसे हमले की पक्की भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता. इन तारीखों पर कोई सैन्य कार्रवाई, जवाबी हमला, जहाज से जुड़ी घटना या तकनीकी चूक तनाव बढ़ा सकती है.

ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने 2 सितंबर को कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का नया सैन्य अभियान ज्यादा समय तक नहीं चलेगा. उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज के पास ईरान के रडार, मिसाइल सिस्टम और समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने से जुड़े उपकरण नष्ट कर दिए हैं.

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका जब चाहे एक और हमला कर सकता है. यानी सैन्य कार्रवाई रोकने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है. अगला हमला होगा या नहीं, इसका फैसला ईरान के जवाब और होर्मुज की स्थिति पर निर्भर कर सकता है.

क्यों बढ़ा एक और हमले का डर?

अमेरिका के ताजा हमलों के बाद ईरान ने जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और इराक में अमेरिकी ठिकानों और हितों की ओर मिसाइलें तथा ड्रोन भेजे. कई हमलों को हवा में रोकने का दावा किया गया है.

ईरान का कहना है कि अमेरिकी हमलों में 18 लोगों की मौत हुई और 108 लोग घायल हुए. ईरानी मीडिया के मुताबिक होर्मुज के पास एक शादी समारोह भी हमले की चपेट में आया. अमेरिका ने कहा है कि नागरिकों की मौत से जुड़ी रिपोर्ट की जांच की जा रही है.

इस घटना ने मामला और गंभीर बना दिया है. ईरान अगर जवाबी कार्रवाई बढ़ाता है तो अमेरिका इसे नए हमले का आधार बना सकता है. दूसरी ओर, ईरान का चुप रहना उसके अपने देश में कमजोरी माना जा सकता है.

कुंडली में कहां से बन रहा हमले का संकेत?

यह विश्लेषण 1 अप्रैल 1979, दोपहर 3 बजे, तेहरान की कुंडली पर आधारित है. ईरान की कुंडली में सिंह लग्न है. अभी गुरु की महादशा में राहु की अंतरदशा चल रही है. राहु की यह अवधि 10 जून 2027 तक रहेगी.

गुरु बातचीत और समाधान की कोशिश कराता है. राहु अचानक स्थिति बदल देता है. यही वजह है कि युद्ध में कई बार समझौते की बात आगे बढ़ती है, लेकिन उसके तुरंत बाद नया हमला हो जाता है.

फिलहाल शुक्र की प्रत्यंतर दशा चल रही है. शुक्र ईरान की कुंडली में तीसरे और दशम भाव का स्वामी है. तीसरा भाव सैन्य साहस, संचार और छोटी दूरी की कार्रवाई से जुड़ा है. दशम भाव सरकार का है. शुक्र सप्तम भाव में केतु के साथ बैठा है. सप्तम भाव दूसरे देशों के साथ खुले संघर्ष और समझौते, दोनों को दिखाता है.

यह स्थिति बताती है कि बातचीत का रास्ता बंद नहीं है. मगर दोनों पक्षों के बीच भरोसा इतना कमजोर है कि कोई भी घटना समझौते को फिर पटरी से उतार सकती है.

वर्षफल में सक्रिय हैं युद्ध के भाव

ईरान के 2026 के वर्षफल में भी सिंह लग्न है. जन्मकुंडली और वर्षफल में एक ही लग्न होना इस साल को सत्ता और देश की पहचान के लिए अहम बनाता है.

वर्षफल के सप्तम भाव में मंगल, बुध और राहु हैं. मंगल हमला और जवाबी कार्रवाई दिखाता है. राहु किसी घटना को अचानक बड़ा बना सकता है. बुध रडार, संचार, सूचना और बातचीत से जुड़ा है. इन तीनों का साथ बताता है कि युद्ध और वार्ता एक साथ चलते रहेंगे.

अष्टम भाव में सूर्य और शनि बैठे हैं. अष्टम भाव अचानक हमला, गुप्त कार्रवाई, बड़े नुकसान और सत्ता संकट का है. वर्ष की मुंथा द्वादश भाव में है. इससे युद्ध पर बढ़ता खर्च, नाकेबंदी, विदेश से दबाव और राष्ट्रीय संसाधनों के नुकसान का संकेत मिलता है.

9 सितंबर की तारीख क्यों महत्वपूर्ण है?

26 अगस्त से 9 सितंबर तक ईरान के वर्षफल में शनि की मुद्दा दशा चल रही है. वर्षफल का शनि अष्टम भाव में बैठा है. मौजूदा गोचर में वक्री शनि भी ईरान के जन्म लग्न से अष्टम भाव में है.

इस तरह वर्षफल, मुद्दा दशा और गोचर में अष्टम भाव एक साथ सक्रिय है. 30 अगस्त के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुआ नया सैन्य टकराव भी इसी अवधि में सामने आया.

लेकिन 9 सितंबर 2026 तक हर दिन एक जैसा खतरनाक नहीं है. ईरान के जन्म नक्षत्र रोहिणी से अगले छह दिनों का नवतारा क्रम देखें तो दो तारीखें अलग दिखाई देती हैं.

6 सितंबर को अचानक बदल सकते हैं हालात

6 सितंबर को चंद्रमा आर्द्रा नक्षत्र में रहेगा. रोहिणी से आर्द्रा ईरान के लिए विपत तारा बनता है. विपत तारा अचानक परेशानी, गलत अनुमान, दुर्घटना और नुकसान से जुड़ा माना जाता है.

आर्द्रा का स्वामी राहु है. ईरान पर पहले से राहु की अंतरदशा चल रही है. वर्षफल के युद्ध भाव में भी राहु मंगल के साथ बैठा है. इस कारण 6 सितंबर को राहु दशा, वर्षफल और नक्षत्र, तीनों स्तर पर सक्रिय होगा.

यह समय मिसाइल या ड्रोन हमले, रडार से जुड़ी गड़बड़ी, किसी जहाज पर कार्रवाई या गलत सूचना के बाद पैदा हुए तनाव से जुड़ सकता है.

8 सितंबर को शत्रु पक्ष की सक्रियता

8 सितंबर को चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में पहुंचेगा. ईरान के जन्म नक्षत्र रोहिणी से पुष्य प्रत्यरि तारा बनता है. प्रत्यरि तारा विरोधी पक्ष, रुकावट और मुकाबले से जुड़ा है.

पुष्य का स्वामी शनि है. उसी समय शनि की मुद्दा दशा चल रही होगी. गोचर का शनि भी अष्टम भाव में है. इसलिए 8 सितंबर को शनि का प्रभाव तीन स्तरों पर सक्रिय होगा.

इस दिन नए हवाई हमले के साथ नाकेबंदी, किसी जहाज को रोकने, सैन्य ठिकाने पर दबाव या लंबी जवाबी कार्रवाई का खतरा रह सकता है.

9 सितंबर के बाद क्या बदलेगा?

9 सितंबर से शनि की जगह बुध की मुद्दा दशा शुरू होगी. बुध वर्षफल के सप्तम भाव में है. इससे बातचीत, संदेशों का आदान-प्रदान और मध्यस्थ देशों की भूमिका बढ़ सकती है.

लेकिन बुध के साथ मंगल और राहु भी हैं. इसलिए यह सामान्य शांति वार्ता नहीं होगी. दोनों पक्ष सैन्य दबाव बनाकर बातचीत करेंगे. समझौते का प्रस्ताव आ सकता है, लेकिन शर्तों पर विवाद भी तुरंत शुरू हो सकता है.

क्या वास्तव में एक और हमला होगा?

कुंडली किसी घटना की सौ प्रतिशत गारंटी नहीं देती. लेकिन ईरान के वर्षफल में सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव एक साथ सक्रिय हैं. शनि की मुद्दा दशा, अष्टम शनि का गोचर और नवतारा गणना खतरे को सामान्य से अधिक बना रही है.

6 सितंबर अचानक सैन्य या तकनीकी घटना के लिए सबसे संवेदनशील है. 8 सितंबर विरोधी पक्ष की कार्रवाई या जवाबी हमले का दूसरा बड़ा बिंदु बन सकता है.

ट्रंप भले ही कह रहे हों कि सैन्य अभियान लंबा नहीं चलेगा, लेकिन 9 सितंबर से पहले युद्ध एक बार फिर करवट ले सकता है. इसके बाद गोलियों की आवाज पूरी तरह बंद हो, यह जरूरी नहीं. मगर युद्ध के साथ बातचीत का रास्ता खुलने की संभावना जरूर बढ़ जाएगी.

FAQs

क्या अमेरिका ईरान पर दोबारा हमला कर सकता है?

ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ फिर सैन्य कार्रवाई कर सकता है. हालांकि किसी नए हमले की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है.

ईरान के लिए 6 सितंबर क्यों संवेदनशील है?

6 सितंबर को आर्द्रा नक्षत्र ईरान के जन्म नक्षत्र रोहिणी से विपत तारा बनेगा. राहु की अंतरदशा के कारण अचानक घटना या तकनीकी चूक का खतरा बढ़ सकता है.

8 सितंबर को क्या हो सकता है?

8 सितंबर को पुष्य नक्षत्र ईरान के लिए प्रत्यरि तारा होगा. इसका स्वामी शनि है और उस समय शनि की मुद्दा दशा भी चल रही होगी. इससे विरोधी कार्रवाई या नाकेबंदी का दबाव बढ़ सकता है.

क्या 9 सितंबर को ईरान युद्ध खत्म हो जाएगा?

नहीं. 9 सितंबर युद्ध समाप्ति की तारीख नहीं है. इसके बाद बुध की मुद्दा दशा शुरू होने से सैन्य तनाव के साथ बातचीत और मध्यस्थता बढ़ सकती है.

ईरान की कौन-सी कुंडली इस्तेमाल की गई है?

यह विश्लेषण 1 अप्रैल 1979, दोपहर 3 बजे, तेहरान की स्थापना कुंडली पर आधारित है. अलग स्थापना समय लेने पर ज्योतिषीय परिणाम बदल सकते हैं.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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