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Toxic Family Members: ‘टॉक्सिक’ रिश्तेदारों से कैसे बनाएं दूरी? गौरांग दास ने बताए 3 अचूक तरीके


How To Deal With Toxic Family Members Calmly: IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट करियर त्याग कर संन्यास लेने वाले गौरांग दास का मानना है कि लगभग हर परिवार में कोई न कोई ऐसा व्यक्ति होता है, जिसका व्यवहार मानसिक रूप से थका देने वाला या नकारात्मक होता है, चाहे वह दूर का रिश्तेदार हो या घर का ही कोई सदस्य. लेकिन असली फर्क इस बात से पड़ता है कि आप ऐसे लोगों से कैसे निपटते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि ऐसे लोगों से कैसे निपटे. 

ऐसे लोगों से कैसे निपटना चाहिए?

वह कहते हैं कि किसी भी रिश्ते को निभाने के लिए अपनी मानसिक शांति की कीमत नहीं चुकानी चाहिए. हर बात पर बहस करना, खुद को सही साबित करने की कोशिश करना या किसी के अपमानजनक व्यवहार को सहते रहना कोई मजबूरी नहीं है. कई बार शांति से जवाब देना, समझदारी से स्थिति संभालना या जरूरत पड़ने पर विनम्र तरीके से अपनी बात रखना ही सबसे बेहतर रास्ता होता है. परिवार के साथ सीमाएं तय करना घमंड नहीं, बल्कि भावनात्मक मजबूती और खुद की सुरक्षा का संकेत है. 

उलझने से बचना चाहिए

पहला तरीका यह है कि जब कोई आपको नीचा दिखाने की कोशिश करे कि जैसे तुमसे कुछ नहीं होगा, तो उससे उलझने के बजाय मुस्कुराकर कह दें कि आप बिल्कुल सही कह रहे हैं.  यह सुनकर सामने वाला असहज हो जाता है, क्योंकि उसे आपकी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं होती. जब आप बहस नहीं करते, तो उनके पास आगे कहने के लिए कुछ बचता ही नहीं और बात वहीं खत्म हो जाती है.

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शालीनता से दें जवाब

दूसरा तरीका तब काम आता है जब लोग बिना मांगे सलाह देने लगते हैं या तुलना करने लगते हैं. अक्सर हम सुनते हैं कि “देखो शर्मा जी के बेटे को, कितना अच्छा कर रहा है, और तुम…” ऐसे में आप शांत रहकर जवाब दे सकते हैं, “ठीक है, आप मेरी मदद कर दीजिए वैसी नौकरी पाने में.” जैसे ही आप उनसे जिम्मेदारी लेने को कहते हैं, वे पीछे हट जाते हैं। इसके बाद वे दोबारा ऐसी तुलना करने से पहले सोचते हैं.

 खुद को कमजोर न दिखाना

तीसरा और सबसे जरूरी तरीका है कि खुद को कमजोर न दिखाना. अगर कोई बार-बार ताने मारता है या आपके मामलों में जरूरत से ज्यादा दखल देता है, तो उसे विनम्र लेकिन साफ शब्दों में रोकना जरूरी है. जैसे आप कह सकते हैं कि “मामा जी, आप इस तरह क्यों बात कर रहे हैं?” या “बुआ जी, कृपया मुझसे इस लहजे में बात न करें.” जब आप शांति और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखते हैं, तो सामने वाला भी सतर्क हो जाता है. सबसे जरूरी बात यही है कि आपकी मानसिक शांति और आत्मसम्मान आपके अपने हाथ में हैं. सिर्फ इसलिए कि कोई परिवार का हिस्सा है, उसके गलत व्यवहार को सहना जरूरी नहीं है. सही सीमाएं तय करना और खुद का सम्मान बनाए रखना ही एक स्वस्थ और संतुलित जीवन की कुंजी है.

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