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दुनिया में फिर होने वाला है तेल संकट, हूती के कब्जे ने बिगाड़ा कई रूट का खेल


लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के ज़रिए स्वेज़ नहर पहुंचने के रास्ते पर संकट पैदा हो गया है. होर्मूज पहले से ही बंद है और हूती ने इस हफ्ते यमन की सीमा के पार सऊदी अरब को निशाना बनाया है. हूती ने लाल सागर में एक अहम पोर्ट मोखा पर कब्ज़ा कर लिया है. बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में पेरिम आईलैंड को भी अपने कब्ज़े में ले लिया है.

बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट कुछ जगहों पर सिर्फ 12.5 मील चौड़ी है. यह एशिया और मिडिल ईस्ट से आने वाले कार्गो जहाजों और टैंकर के लिए ये बहुत संकरा रास्ता है जो स्वेज़ नहर को जाता है. पेरिम आईलैंड से शिपिंग लाइन्स की दूरी तीन मील से भी कम है और ये हूती की मिसाइल और ड्रोन की रेंज में है. इसलिए यह एक बड़ा संकट माना जा रहा है. 

ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को बंद करने के बाद सऊदी अरब तेल को ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के ज़रिए लाल सागर के पोर्ट तक पहुंचा रहा था और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट पर निर्भरता को बढ़ा रहा था. लेकिन गुरुवार को ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले के बाद अब सऊदी अरब ने उसे भी बंद कर दिया है.

लाल सागर पर हूती के कब्ज़े का असर 

लाल सागर में हूती के खतरे की वजह से जहाज़ों का निकलना मुश्किल हो गया है. दुनिया के एनर्जी कॉरिडोर धीरे-धीरे बंद हो रहे हैं. एशिया में व्यापार के लिए बाब-अल-मंदेब के रास्ते गल्फ ऑफ एडेन के रास्ते सीधे अरब सागर में पहुंचा जा सकता है.  जबकि यूरोप पहुंचने के लिए बाब-अल-मंदेब से लाल सागर और स्वेज़ नहर होते हुए भूमध्यसागर का रास्ता लिया जाता है. 

सऊदी अरब का तेल सबसे ज़्यादा एशिया के देशों को जाता है. एशिया तक पहुंचने के लिए बाब-अल-मंदेब का रास्ता भी अब बंद हो चुका है. सऊदी अरब के पास एक और रास्ता है कि वो पाइपलाइन के ज़रिए तेल को उत्तर में स्वेज़ नहर के पास पहुंचाए. लेकिन एशिया के लिए भूमध्यसागर का ये रास्ता महंगा और बहुत लंबा है.  

सऊदी की ईस्ट-वेस्ट पाइप्लाइन बंद होने से महंगा होगा तेल का व्यापार 

होर्मूज को बाईपास करने वाली ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले के बाद सऊदी अरब ने उसे फिलहाल बंद कर दिया है. होर्मूज जलडमरूमध्य में ईरान-अमेरिकी तनाव के कारण तेल निकासी बाधित होने के बाद, यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए मुख्य वैकल्पिक मार्ग बन गई थी।

लाल सागर से स्वेज़ नहर के रास्ते यूरोप का रास्ता आसान था लेकिन बाब-अल-मंदेब बंद होने से जहाज़ों को अफ्रीका महाद्वीप के केप ऑफ गुड से घूमकर जाना होगा जो बहुत लंबा और महंगा रास्ता है. सिर्फ ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का तेल इस रास्ते से भेजा जा सकता है लेकिन वह पाइपलाइन भी अब बंद है.

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