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LAC समझौता और 5 साल बाद शिखर वार्ता… कैसे पटरी पर लौट रहे भारत-चीन रिश्ते


ब्रिक्स समिट 2026 के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिपनिंग दिल्ली पहुंच गए हैं. जिनपिंग के भारत आने से दोनों देशों के बीच बढ़ी दूरी खत्म होने की उम्मीद है. जिनपिंग का दौरा कई मायनों में अहम है. अगर भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की बात करें तो ये काफी पुराने हैं और समय बदलने के साथ-साथ रिश्तों में भी बदलाव आया है. 

भारत 1 अप्रैल 1950 को चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाला पहला गैर-समाजवादी गुट का देश बना था. साल 1962 के सीमा संघर्ष से दोनों देशों के संबंधों को झटका लगा, लेकिन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 1988 में चीन यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की शुरुआत की.

पिछले एक दशक में कई उच्चस्तरीय यात्राओं के जरिए भारत-चीन संबंधों का विस्तार हुआ और वे कई क्षेत्रों तक पहुंचे. सितंबर 2014 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘नजदीकी विकासात्मक साझेदारी’ के रूप में नया रूप दिया. मई 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन की यात्रा की और राष्ट्रपति शी जिनपिंग तथा प्रधानमंत्री ली केकियांग के साथ बैठक की. 

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी ने 27-28 अप्रैल 2018 को वुहान में अपनी पहली अनौपचारिक शिखर बैठक और 11-12 अक्टूबर 2019 को चेन्नई में दूसरी अनौपचारिक शिखर बैठक की.

प्रधानमंत्री मोदी ने कब किया चीन दौरा

प्रधानमंत्री मोदी ने हांगझोउ में G20 शिखर सम्मेलन (सितंबर 2016), श्यामेन में BRICS शिखर सम्मेलन (सितंबर 2017), चिंगदाओ में SCO शिखर सम्मेलन (जून 2018) और हाल ही में तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन (1 सितंबर 2025) में हिस्सा लेने के लिए चीन की यात्रा की. राष्ट्रपति शी जिनपिंग अक्टूबर 2016 में गोवा में BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए थे. चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग सितंबर 2023 में G20 शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे.

अटल बिहारी वाजपेयी ने चीन के साथ समझौते पर किए थे हस्ताक्षर

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 2003 में चीन यात्रा के दौरान भारत और चीन ने ‘संबंधों और व्यापक सहयोग के सिद्धांतों पर घोषणा’ पर हस्ताक्षर किए. दोनों देशों ने सीमा विवाद के समाधान के लिए एक रूपरेखा तलाशने के उद्देश्य से विशेष प्रतिनिधियों (SRs) की नियुक्ति पर भी सहमति जताई. अप्रैल 2005 में चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने ‘शांति और समृद्धि के लिए रणनीतिक और सहयोगी साझेदारी’ स्थापित की.

अप्रैल-मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हुई घटनाओं से द्विपक्षीय संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ा. इसके बाद दोनों नेताओं के बीच नवंबर 2022 में बाली में G20 शिखर सम्मेलन और अगस्त 2023 में जोहान्सबर्ग में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान संक्षिप्त बातचीत हुई.

जब 2020 में सेनाओं के बीच हुआ टकराव

2020 के सभी टकराव वाले क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी और LAC पर गश्त की व्यवस्था को लेकर समझौता होने के बाद, दोनों नेताओं ने करीब 5  वर्षों में पहली बार 23 अक्टूबर 2024 को कजान में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान पूर्ण प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की.

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने चीन की यात्रा की, जहां उन्होंने 31 अगस्त 2025 को राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की और 1 सितंबर 2025 को तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया.

कजान में अक्टूबर 2024 की नेताओं की बैठक के बाद दोनों देशों के बीच कई स्तरों पर संपर्क और बैठकें हुई हैं. इनमें विशेष प्रतिनिधियों की 23वीं और 24वीं दौर की वार्ता शामिल है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 23वें दौर की वार्ता के लिए 18 दिसंबर 2024 को बीजिंग गए थे. वहीं, पोलित ब्यूरो सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी 24वें दौर की वार्ता के लिए 19 अगस्त 2025 को नई दिल्ली आए थे. इस यात्रा के दौरान विदेश मंत्री वांग यी ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी बैठक की.

विदेश मंत्री वांग यी जून 2026 में BRICS राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत आए और 22 जून 2026 को उन्होंने NSA के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की. विदेश मंत्री और वांग यी ने 18 नवंबर 2024 और 21 फरवरी 2025 को क्रमशः रियो डी जेनेरियो और जोहान्सबर्ग में बहुपक्षीय बैठकों के दौरान द्विपक्षीय बैठकें कीं. इसके अलावा 22 जुलाई 2026 को पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन और ASEAN क्षेत्रीय मंच के दौरान भी दोनों की मुलाकात हुई.

भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों (SR) की व्यवस्था 2003 में स्थापित की गई थी और अब तक 24 दौर की वार्ता हो चुकी है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और पोलित ब्यूरो सदस्य एवं विदेश मंत्री वांग यी के बीच 24वें दौर की वार्ता 19 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में हुई.

भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (WMCC) जनवरी 2012 में नई दिल्ली में विशेष प्रतिनिधियों की 15वीं दौर की वार्ता के दौरान हुए समझौते के परिणामस्वरूप बना था. जून 2020 से दोनों पक्ष पूर्वी लद्दाख में LAC के पास सीमा क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी के लिए WMCC और वरिष्ठ कमांडरों की बैठकों (SCM) के माध्यम से बातचीत कर रहे हैं. WMCC की अब तक 35 बैठकें हो चुकी हैं और इसकी सबसे हालिया बैठक 28 मई 2026 को बीजिंग में हुई.

लोगों के बीच संपर्क द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. वर्ष 2025 में भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा करीब पांच साल के अंतराल के बाद लिपुलेख और नाथू ला दोनों मार्गों से फिर शुरू हुई. वर्ष 2026 में भी यह यात्रा जारी रही और जून 2026 में नाथू ला से पहला जत्था रवाना किया गया. दोनों देशों के बीच निर्धारित स्थानों को जोड़ने वाली सीधी उड़ान सेवाएं अक्टूबर 2025 में फिर शुरू हुईं.

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