राजस्थान में एक तरफ बीजेपी, महिला आरक्षण बिल को लेकर सीएम भजनलाल शर्मा और डिप्टी सीएम दिया कुमारी की अगुवाई में कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है. महिलाओं के हमदर्द होने का दावा कर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया जा रहा है. वहीं, राजस्थान में बीजेपी की सरकार होने बावजूद राज्य महिला आयोग में चेयरमैन और सदस्यों के पद तकरीबन सवा साल से खाली पड़े हुए हैं. आयोग खाली होने से रोजाना तकरीबन 100 से ज्यादा की संख्या में आने वाली पीड़ित महिलाओं की समस्याओं के निपटारे में दिक्कत आ रही है.
70 फीसदी के करीब मामले अटके पड़े हुए हैं. यह हाल तब है जब वर्ल्ड क्लास सिटी कही जाने वाली राजधानी जयपुर में महिलाओं के साथ लगातार छेड़खानी और चेन स्नेचिंग की घटनाएं सामने आ रही हैं. प्रदेश में भजन लाल शर्मा की सरकार बनने के बाद महिला आयोग में कोई भी नियुक्ति नहीं हुई है. राज्य महिला आयोग के खाली पद बीजेपी के महिला हितैषी होने के दावे पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
राजस्थान महिला आयोग को अब खुद न्याय का इंतजार!
महिला आयोग में पदों के खाली होने पर कांग्रेस भले ही भजनलाल शर्मा सरकार और बीजेपी पर सवाल खड़े कर रही है, लेकिन एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि अशोक गहलोत की अगुवाई वाली कांग्रेस की पिछली सरकार में भी राज्य महिला आयोग में करीब 38 महीने तक कोई नियुक्ति नहीं हुई थी. यानी महिलाओं के हमदर्द होने को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही बड़े-बड़े दावे करती हों, लेकिन राजस्थान में पीड़ित महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए बनाए गए महिला आयोग को अब खुद अपने साथ न्याय का इंतजार है.
रिहाना चिश्ती का कार्यकाल कब हुआ खत्म?
राजस्थान में अशोक गहलोत राज में राज्य महिला आयोग में चेयरमैन के पद पर नियुक्त हुई रिहाना चिश्ती का कार्यकाल 11 फरवरी 2025 को खत्म हो गया था. उनके साथ सदस्य रही तीनों महिलाओं के कार्यकाल भी लगभग इसी समय अलग-अलग तारीखों पर खत्म हो गए. आयोग में तब से कोई भी नियुक्ति नहीं हुई है. राजस्थान राज्य महिला आयोग की अगर बात की जाए तो यहां पांच सदस्यों का बोर्ड होता है. बोर्ड की मुखिया अध्यक्ष होती हैं. तीन सदस्य राज्य सरकार द्वारा किसी भी क्षेत्र में खास तरीके से काम करने वाली महिलाओं को नियुक्त किया जाता है, जबकि सदस्य सचिव पुलिस या प्रशासनिक सेवा की कोई महिला अधिकारी होती हैं.
पिछले सवा साल से खाली हैं पद
मौजूदा समय में चेयरमैन और सदस्यों के तीनों पद पिछले करीब सवा साल से खाली है. सदस्य सचिव के पद पर किसी भी अधिकारी की पूर्णकालिक नियुक्ति नहीं है. एडिशनल एसपी रैंक की महिला अधिकारी दीप्ति जोशी को यहां की सदस्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा गया है. वह यहां के लिए कभी कभार ही वक्त निकाल पाती हैं.
आयोग में आती हैं रोजाना 100 से ज्यादा शिकायतें
अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने की वजह से महिला आयोग का दफ्तर महज शो पीस बनकर रह गया है. पूरा आयोग रजिस्ट्रार और बाबुओं के भरोसे चल रहा है. इनमें से भी इक्का-दुक्का छोड़कर सभी पुरुष ही हैं. आयोग में रोजाना 100 से ज्यादा शिकायतें आती हैं. मौजूदा समय में यहां शिकायतों को संबंधित विभागों में भेजने का काम भर किया जा रहा है.
4138 शिकायतों में से कितने का निपटारा?
11 फरवरी 2025 को रिहाना चिश्ती का कार्यकाल खत्म होने के बाद से इस साल 31 मार्च तक जयपुर के गांधीनगर इलाके में स्थित राज्य महिला आयोग में 4138 शिकायतें आई हैं. यह सभी शिकायतें पुलिस या संबंधित विभागों को जांच या कार्रवाई के लिए ट्रांसफर कर दी गई है. यानी आयोग सिर्फ पोस्टमैन बन कर रह गया है. 4138 शिकायतों में से 1436 का निपटारा किया गया है.
ज्यादातर में निर्णय यह हुआ है कि शिकायत को निस्तारण के लिए संबंधित विभाग में भेजने की औपचारिकता निभाई गई है. यानी इंसाफ दिलाने के बजाय फाइलों को एक से दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया गया है. 2702 शिकायतें यानी करीब दो तिहाई मामले अभी पेंडिंग ही है. सवा साल के खालीपन में 1561 पुरानी शिकायतों को भी दूर किए जाने का दावा किया जा रहा है.
पीड़ित महिलाओं को सिर्फ मिल रही तारीख पर तारीख!
पीड़ित महिलाओं को सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही है. पार्ट टाइम सदस्य सचिव के भरोसे चल रहे आयोग में काम बिना रुकावट के किए जाने का दावा जरूर किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. दफ्तर में अंधेरा सा नजर आता है. पीछे का गेट महीनों से नहीं खुला है. यह गेट अब कूड़ाखाने में तब्दील हो चुका है. यहां गंदगी का अंबार है. गेट के बगल में लगा साइन बोर्ड बदहाली का शिकार होकर झुक गया है और वह झाड़ू स्टैंड बन चुका है.
‘करीब चार करोड़ आबादी के साथ नाइंसाफी’
इस बारे में महिला वकील विजेता यादव का कहना है कि आयोग के खाली होने से पीड़ित महिलाओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उनका कहना है कि यह राज्य की करीब चार करोड़ आबादी के साथ ना इंसाफी है. राज्य महिला आयोग में पीड़ित महिलाओं को कानूनी मदद मुहैया कराने वाली राजस्थान हाई कोर्ट की एडवोकेट और सोशल एक्टिविस्ट वंदना चौहान ने कहा, ”चेयरमैन और सदस्यों के पद खाली होने से आयोग सफेद हाथी बनकर रह गया है. यहां सिर्फ रस्म अदायगी हो रही है. सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए इस बारे में फौरन कदम उठाने चाहिए.”
जयपुर फैमिली कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष क्या बोले?
वहीं, जयपुर फैमिली कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महिला मामलों के जानकार महेश चावला ने कहा, ”पीड़ित महिलाओं की शिकायत सुनने के लिए यहां कोई भी जिम्मेदार नहीं मिलता है. सिर्फ शिकायतें जमा करा ली जाती हैं. आयोग के खाली होने से जिलों में होने वाली सुनवाई भी पूरी तरह ठप है. सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए.”
डिप्टी CM दिया कुमारी के पास है महिला कल्याण विभाग
राजस्थान में महिला कल्याण विभाग डिप्टी सीएम दिया कुमारी के पास है, जबकि इसकी राज्य मंत्री मंजू बाघमार है. दोनों मंत्री खुद भी महिला ही हैं, लेकिन उनके पास आधी आबादी का दर्द सुनने और उन्हें इंसाफ दिलाने के लिए आयोग में चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति कर पाने का वक्त नहीं है.
कांग्रेस का भजनलाल सरकार पर हमला
इस मामले में कांग्रेस राज्य की भजन लाल शर्मा सरकार पर जमकर निशाना साध रही है. उसे सवालों के कटघरे में खड़ा कर रही है. इस मामले को लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडलिस्ट रही कांग्रेस पार्टी की पूर्व विधायक पद्मश्री डॉ. कृष्णा पूनिया ने कहा, ”बीजेपी की कथनी और करनी में हमेशा से फर्क रहा है. यह मामला सीधे तौर पर उसके दोहरे चरित्र को उजागर करता है. राजनीतिक रोटियां सेंकने के बजाय जल्द से जल्द महिला आयोग में नियुक्तियां की जानी चाहिए, ताकि पीड़ित महिलाओं को इंसाफ मिल सके.”
बीजेपी का पलटवार
राज्य महिला आयोग में खाली पदों के मुद्दे को लेकर बैक फुट पर आई बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार किया है. राजस्थान बीजेपी की प्रवक्ता और महिला मोर्चे की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौर ने कहा, ”महिला विरोधी कांग्रेस ने अशोक गहलोत के राज में 38 महीने तक पूरे आयोग को खाली रखा था. महिलाओं के मामले में राज्य की स्थिति बद से बदतर हो गई थी. भजनलाल शर्मा सरकार उसे तेजी से ठीक करने में लगी हुई है. महिला आयोग में काम हो रहा है. बीजेपी और सरकार दोनों ही संवेदनशील है और जल्द ही आयोग में नियुक्तियां हो जाएंगी. कांग्रेस को इस मामले में आरोप लगाने का कोई अधिकार ही नहीं है.”
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