Dhanteras 2026: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के अवसर पर आज, 6 नवंबर 2026 को पूरे देश में धनतेरस का महापर्व मनाया जा रहा है, जिससे छह दिवसीय दीपोत्सव का शुभारंभ हो चुका है. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान (जयपुर-जोधपुर) के निदेशक, भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, आज प्रदोष काल में शाम 06:19 से रात 08:17 बजे तक वृषभ लग्न रहेगा, जो मां लक्ष्मी और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि के पूजन के लिए सबसे मंगलकारी स्थिर मुहूर्त है.
इस बार का खास पहलू यह है कि तिथियों के दुर्लभ संयोग के कारण खरीदारी का अखंड महामुहूर्त पूरे 20 घंटे (आज सुबह 10:30 से 7 नवंबर सुबह 06:37 बजे तक) बना रहेगा, जिसमें की गई खरीदारी 13 गुना फलदायी मानी गई है.
इस बार 5 नहीं, पूरे 6 दिनों का होगा दीपोत्सव:
6 नवंबर 2026: धनतेरस (धनत्रयोदशी व धन्वंतरि जयंती)
7 नवंबर 2026: रूप चौदस (छोटी दीपावली / नरक चतुर्दशी)
8 नवंबर 2026: महालक्ष्मी पूजन (दीपावली)
9 नवंबर 2026: रामा-श्यामा (पारस्परिक मिलन पर्व)
10 नवंबर 2026: गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट महोत्सव
11 नवंबर 2026: भाई दूज (यम द्वितीया)
धनतेरस 2026: त्रयोदशी तिथि कब से कब तक?
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर 2026, सुबह 10:30 बजे से
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर 2026, सुबह 10:48 बजे तक
प्रदोष काल व पूजन मुहूर्त:
लक्ष्मी-कुबेर पूजन का श्रेष्ठ समय: शाम 06:19 बजे से रात 08:17 बजे तक (अवधि: कुल 1 घंटा 58 मिनट)
प्रदोष काल: शाम 05:49 बजे से रात 08:23 बजे तक
वृषभ लग्न (स्थिर लग्न): शाम 06:19 बजे से रात 08:17 बजे तक
खरीदारी का महामुहूर्त:
खरीदारी की शुभ अवधि: 6 नवंबर सुबह 10:30 बजे से 7 नवंबर सुबह 06:37 बजे तक (लगभग 20 घंटे का अखंड शुभ समय).
यम दीपदान: अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति का अचूक उपाय
धनतेरस की शाम को मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त दीप प्रज्वलित करने का विशेष विधान है, जिसे यम दीपदान कहा जाता है.
दीपक की संख्या: धनतेरस की रात कुल 13 दीपक जलाना बहुत कल्याणकारी माना गया है.
दिशा और स्थान: परिवार के सभी सदस्यों के घर आ जाने के बाद, घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक चौमुखी बड़ा दीपक जलाएं.
महत्व: शास्त्रों में दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है. मान्यता है कि इस रात्रि यमराज के निमित्त दीपदान करने से परिवार के सदस्यों पर मंडरा रहा अकाल मृत्यु का संकट टलता है और गंभीर व्याधियों से मुक्ति मिलती है. यह दीपक बाकी दीयों की तुलना में थोड़ा बड़ा रखें ताकि यह रातभर प्रज्वलित रहे.
राशि अनुसार धनतेरस की खरीदारी: जानें आपके लिए क्या रहेगा सबसे भाग्यशाली
धनतेरस के दिन खरीदी गई वस्तु में तेरह गुना वृद्धि होती है. अगर आप अपनी राशि के स्वामी ग्रह के अनुकूल खरीदारी करते हैं, तो आर्थिक उन्नति के नए मार्ग खुलते हैं:
1. मेष राशि
मेष राशि के स्वामी ग्रह मंगल देव हैं. इस राशि के लोगों को धनतेरस पर चांदी के सिक्के, आभूषण या चांदी के बर्तन खरीदने चाहिए. इसके अलावा आप सोने या पीतल की वस्तुएं भी खरीद सकते हैं. ऐसा करने से कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी और कार्यक्षेत्र में तरक्की मिलेगी.
2. वृषभ राशि
वृषभ राशि के स्वामी भौतिक सुखों के कारक शुक्र देव हैं. आपके लिए चांदी की वस्तुएं, चांदी के सिक्के या आभूषण खरीदना बेहद शुभ रहेगा. यदि आपका बजट अनुकूल हो, तो आप हीरा जड़ित कोई आभूषण भी ले सकते हैं. इससे आपके जीवन में आकर्षण और ऐश्वर्य की वृद्धि होगी.
3. मिथुन राशि
मिथुन राशि के स्वामी बुध देव हैं. धनतेरस के शुभ अवसर पर आपके लिए कांसे के बर्तन या सोने के आभूषण खरीदना उत्तम रहेगा. यदि आप रत्न खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो पन्ना रत्न या उससे जड़ा आभूषण खरीदना आपके व्यापार और बौद्धिक क्षमता में अभूतपूर्व उन्नति लाएगा.
4. कर्क राशि
कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा हैं. इस राशि के लोगों को धनतेरस पर चांदी के आभूषण, चांदी की लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति, चांदी का श्रीयंत्र या मोती की माला खरीदनी चाहिए. आप चांदी में मोती जड़ित अंगूठी भी धारण कर सकते हैं. इससे मानसिक शांति और घर में स्थायी बरकत बनी रहेगी.
5. सिंह राशि
सिंह राशि के स्वामी ग्रहों के राजा सूर्य देव हैं. सिंह राशि वालों के लिए धनतेरस पर सोना खरीदना सर्वोत्तम माना गया है. आपका शुभ रत्न माणिक्य है. यदि आपका बजट अधिक नहीं है, तो आप तांबे के बर्तन या उन वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं जिन पर सोने का पानी चढ़ा हो. इससे मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी.
6. कन्या राशि
कन्या राशि के स्वामी बुध देव हैं. इस राशि के लोगों को धनतेरस पर कांसे या फूल (मिश्र धातु) के बर्तन खरीदने चाहिए. ऐसा करने से कुंडली में बुध ग्रह बलवान होता है. इसके अलावा आप मोती की माला या पन्ना रत्न भी खरीद सकते हैं, जो आपके करियर और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी रहेगा.
7. तुला राशि
तुला राशि के स्वामी शुक्र देव हैं. तुला राशि के लोगों के लिए धनतेरस पर शुद्ध चांदी के बर्तन, सिक्के या कलात्मक आभूषण खरीदना सबसे फलदायी रहेगा. सफेद धातु की वस्तुएं घर लाने से आपकी धन-संपत्ति में स्थायित्व आएगा और दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी.
8. वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के स्वामी सेनापति मंगल देव हैं. धनतेरस पर वृश्चिक राशि के लोगों को तांबे के बर्तन, शुद्ध चांदी या चांदी के आभूषण खरीदने चाहिए. तांबे के पात्र घर लाने से आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, पुरानी परेशानियों से राहत मिलेगी और आर्थिक लाभ के योग बनेंगे.
9. धनु राशि
धनु राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं. धनु राशि के लोगों को धनतेरस पर सोने के आभूषण, सोने के सिक्के या पीतल के बर्तन जरूर खरीदने चाहिए. पीली धातुओं का संबंध गुरु ग्रह से होने के कारण यह खरीदारी आपके घर-परिवार में पूरे वर्ष धन-धान्य और समृद्धि की कमी नहीं होने देगी.
10. मकर राशि
मकर राशि के स्वामी कर्मफल दाता शनि देव हैं. मकर राशि के लोगों को धनतेरस वाले दिन स्टील के बर्तन या अपने उपयोग के लिए कोई नया वाहन खरीदना चाहिए. इसके अलावा आप घरेलू इलेक्ट्रॉनिक सामान भी ले सकते हैं. इस खरीदारी से पूरे वर्ष आपकी कार्यक्षमता और उन्नति में निरंतरता बनी रहेगी.
11. कुंभ राशि
कुंभ राशि के स्वामी भी शनि देव ही हैं. कुंभ राशि के लोगों के लिए धनतेरस के दिन नया वाहन या स्टील के बर्तन खरीदना अत्यंत लाभकारी रहेगा. इसके उपरांत आप अपने सामर्थ्य अनुसार चांदी या सोने की वस्तुएं भी खरीद सकते हैं. इससे आपके करियर में ग्रोथ और आर्थिक स्थिरता आएगी.
12. मीन राशि
मीन राशि के स्वामी ज्ञान और सौभाग्य के देवता बृहस्पति हैं. मीन राशि के लोगों को धनतेरस पर सोने के आभूषण या पीतल के पूजा पात्र व बर्तन खरीदने चाहिए. इस दिन पीतल का कलश या धार्मिक वस्तुएं घर लाने से परिवार में सुख, शांति और सौभाग्य में चौतरफा वृद्धि होती है.
सावधान! धनतेरस पर भूलकर भी न खरीदें ये चीजें:
लोहा और नुकीली वस्तुएं: धनतेरस के दिन कैंची, चाकू, सुई या लोहे के औजार खरीदने से बचना चाहिए, क्योंकि इन्हें घर में नेगेटिव एनर्जी लाने वाला माना गया है.
कांच का सामान: ज्योतिष शास्त्र में कांच का सीधा संबंध छाया ग्रह राहु से माना गया है. इसलिए धनतेरस के पावन दिन कांच के बर्तन या शोपीस घर न लाएं.
खाली बर्तन घर लाना: अगर आप इस दिन कोई धातु का बर्तन खरीद रहे हैं, तो उसे घर के अंदर लाते समय उसमें थोड़े अक्षत (चावल), बताशे या जल जरूर भर लें. खाली बर्तन सीधे रसोई या तिजोरी में ले जाना वर्जित माना जाता है.
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