संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है. इस बार सरकार जो विधेयक लेकर आ रही है, वे देश की राजनीति, चुनाव प्रणाली, आरक्षण और सत्ता के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकते हैं. एक तरफ सरकार अपने अहम विधेयकों को पास कराने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई और NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने को तैयारी है. इसके बीच संसदीय अंकगणित में ऐसे बदलाव हुए हैं, जिन्होंने विपक्ष की कमर तोड़ दी है…
संसद में बजट सत्र से अब तक कितना बदला खेल?
यह हिस्सा इस पूरे सत्र का असली गेमचेंजर है. बजट सत्र (फरवरी 2026) से लेकर अब जुलाई 2026 तक संसदीय अंकगणित बदल चुका है. NDA मजबूत और विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन कमजोर पड़ गया है.
अप्रैल 2026 के बजट सत्र के बाद से राजनीति में इतना बड़ा उलटफेर हुआ है कि संसद की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है.
लोकसभा में क्या बदला:
| पहलू | बजट सत्र (अप्रैल 2026) | मानसून सत्र (जुलाई 2026) |
| NDA का समर्थन | करीब 293 सांसद | 319 सांसद (20 बागी TMC और 6 UBT शिवसेना) |
| दो-तिहाई का आंकड़ा | 543 में से 363 | 360 (बसीरहाट, शिलांग और नौगांव खाली) |
| NDA की पहुंच | 298 वोट (अप्रैल में मिले थे) | संभावित 348 |
| अंतर (दो-तिहाई से) | 54 वोट कम | महज 12 वोट कम |
NDA की मजबूती की 3 बड़ी वजहें:
- TMC का बंटवारा: ममता बनर्जी की पार्टी के 28 में से 20 सांसद टूटकर नेशनल कॉमन पीपुल्स इनिशिएटिव (NCPI) में शामिल हो गए और NDA को समर्थन दे रहे हैं. स्पीकर ओम बिरला इनके विलय पर फैसला लेंगे.
- शिवसेना (UBT) की कमजोरी: उद्धव ठाकरे के गुट के 6 सांसद एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो गए.
- DMK-कांग्रेस गठबंधन टूटना: तमिलनाडु में कांग्रेस के TVK से गठबंधन के बाद DMK INDIA गठबंधन से अलग हो गया. DMK के 22 सांसद अब विपक्ष के साथ नहीं गिने जाएंगे. हालांकि DMK NDA में शामिल नहीं हुआ है, लेकिन बीजेपी को उम्मीद है कि वह चुनिंदा बिलों पर इश्यू-बेस्ड समर्थन दे सकता है.
राज्यसभा में बदलाव:
| पहलू | आंकड़ा |
| सदन की कुल सीटें | 245 (फिलहाल 242) |
| NDA की ताकत | 141 सांसद और 10 मनोनीत/निर्दलीय मिलाकर कुल 151 |
| साधारण बहुमत | 121 (पार) |
| दो-तिहाई बहुमत | 163 |
| NDA की कमी | महज 11 वोट कम |
सात AAP सांसदों के बीजेपी में शामिल होने से और हाल के राज्यसभा चुनावों में 19 सीटें जीतने से NDA को फायदा हुआ है.
मानसून सत्र में सरकार कौन से विधेयक ला रही है?
1. महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम)
यह वही विधेयक है जो सितंबर 2023 में संसद के विशेष सत्र में पारित हुआ था, लेकिन अब तक लागू नहीं हो पाया है. इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना है. इसमें एक बड़ी शर्त जुड़ी है कि यह आरक्षण तभी लागू होगा जब परिसीमन (डेलिमिटेशन) की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. 2024 के लोकसभा चुनाव में महिला मतदाताओं की भागीदारी 65.78% रही थी, जो पुरुषों (65.55%) से थोड़ी ज्यादा थी. यह आंकड़ा बताता है कि महिलाएं अब चुनावी राजनीति में कितनी बड़ी ताकत बन चुकी हैं. हर पार्टी इस बिल को अपने पक्ष में दिखाना चाहती है.
2. परिसीमन विधेयक
यह इस सत्र का सबसे विस्फोटक मुद्दा हो सकता है. परिसीमन का मतलब है जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों का नए सिरे से बंटवारा. 2026 की जनगणना के बाद यह प्रक्रिया शुरू होनी है. दक्षिण भारत के तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में इसका कड़ा विरोध हो रहा है. दक्षिण भारत ने जनसंख्या कंट्रोल करने में कामयाबी हासिल की है और उन्हें डर है कि उनकी सीटें घट जाएंगी, जबकि उत्तर भारत के राज्यों को इसका फायदा मिलेगा.
3. एक देश, एक चुनाव
129वें संविधान संशोधन बिल से सरकार लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने का बड़ा प्लान लेकर आ रही है. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमेटी ने मार्च 2024 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी, जिसमें इसकी सिफारिश की गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, एक साथ चुनाव कराने से हर साल होने वाले चुनावों पर खर्च होने वाले हजारों करोड़ रुपये बचेंगे और विकास कार्यों में आने वाली रुकावटें खत्म होंगी. इसके लिए संविधान के कम से कम पांच अनुच्छेदों (83, 85, 172, 174, 356) में संशोधन करना होगा और इसके लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत पड़ेगी. विपक्षी दल इसे संघीय ढांचे पर हमला बता रहे हैं.
4. FCRA संशोधन विधेयक
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) में संशोधन करके सरकार NGO और धार्मिक संस्थाओं को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर सख्त कंट्रोल चाहती है. इसके तहत, FCRA रजिस्ट्रेशन की अवधि को घटाने, फंड के इस्तेमाल पर कड़ी निगरानी और उल्लंघन करने पर आपराधिक मुकदमा चलाने जैसे प्रावधान लाए जा सकते हैं. सरकार का तर्क है कि इससे विदेशी दखल रुकेगा, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे सामाजिक कार्यकर्ताओं और संस्थाओं का उत्पीड़न होगा.
5. 130वां संविधान संशोधन बिल
यह विधेयक इस सत्र का सबसे चौंकाने वाला और चर्चित प्रस्ताव है. इसके तहत, अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी आपराधिक मामले में दोषी पाया जाता है और उसे जेल की सजा होती है, तो सजा शुरू होने के 30 दिनों के भीतर वह खुद ही अपने पद से हट जाएगा. अभी तक ऐसा कोई प्रावधान नहीं है और सजायाफ्ता नेता पद पर बने रहने की कोशिश करते हैं. हालाकि, इसे पारित कराना आसान नहीं होगा, क्योंकि खुद कई दलों के नेता इसकी चपेट में आ सकते हैं.
इसके अलावा विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, एंटी-डोपिंग बिल, सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या बढ़ाने का बिल और कॉरपोरेट कानून में सुधार पेश किए जाएंगे.
विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार को घेरेगा?
विपक्ष इस सत्र में सरकार को 5 बड़े मुद्दों पर घेरेगा:
- बेरोजगारी: सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में बेरोजगारी दर 8.1% थी, जो पिछले साल के 7.4% से ज्यादा है. 20-24 आयु वर्ग के युवाओं में यह दर और भी ज्यादा है. विपक्ष इसे सरकार की नीतियों की विफलता बताएगा.
- महंगाई: खाद्य महंगाई दर लगातार आम आदमी की कमर तोड़ रही है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) जून 2026 में 5.1% रहा, लेकिन खाद्य वस्तुओं की महंगाई 7.4% तक पहुंच गई है. दाल, तेल और सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं.
- पेट्रोल-डीजल की कीमतें: ईरान-अमेरिका युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की वजह से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं. इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर पड़ा है, जो 8-12 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुकी हैं. आम आदमी की जेब पर इसकी सीधी चोट है और विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने से नहीं चूकेगा.
- NEET पेपर लीक स्कैंडल: मई 2026 में हुई NEET परीक्षा का पेपर लीक होने का मामला अब भी ताजा है. लाखों छात्रों का भविष्य इससे प्रभावित हुआ है और सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है. विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार की जमकर खिंचाई करेगा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज होगी.
- राजनाथ सिंह का ‘झूठ’ विवाद: कांग्रेस रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करना चाहती है. आरोप है कि राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान लोकसभा में कहा था कि ‘कोई भी भारतीय सैनिक शहीद नहीं हुआ’, जबकि बाद में सरकार ने सैन्य हताहतों को स्वीकार किया.
क्या NDA बिल पास कर पाएगा?
संविधान संशोधन के लिए दो शर्तें हैं:
- कुल सदस्यता का बहुमत यानी 543 में से कम से कम 272 सांसद
- उपस्थित और वोट डालने वालों का दो-तिहाई, यानी अगर 500 सांसद वोट डालते हैं, तो कम से कम 334 वोट.
अब ससंद में सरकार की मौजूदा स्थिति देखें:
- NDA की मौजूदा ताकत: 319 सांसद
- दो-तिहाई का आंकड़ा: 360 (3 सीटें खाली होने की वजह से)
- अंतर: 41 वोट
सरकार को और कहां से वोट मिल सकते हैं?
- DMK के 22 सांसद (इश्यू-बेस्ड सपोर्ट).
- अप्रैल में NDA को 5 वोट अलग से मिले थे.
- अन्य क्षेत्रीय दलों का समर्थन.
अगर सब कुछ सही रहा तो NDA के पास 346 वोट हो जाएंगे. सिर्फ 14 वोट कम पड़ेंगे.
