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Pakistan-US Relations: कंगाल पाकिस्तान का करोड़ों का दांव! अमेरिका में 1.3 मिलियन डॉलर की लॉबिंग डील, वजह जानकर चौंक जाएंगे


पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. देश में महंगाई बढ़ रही है, कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं. इसी बीच पाकिस्तान सरकार ने अमेरिका में अपनी छवि बेहतर बनाने और अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए एक बड़ी लॉबिंग डील पर हस्ताक्षर किए हैं.

मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में 1.3 मिलियन डॉलर यानी लगभग 11 करोड़ रुपये की लॉबिंग डील की है. इस समझौते का उद्देश्य अमेरिका में पाकिस्तान की छवि को मजबूत करना और दक्षिण एशिया से जुड़ी अमेरिकी नीतियों में अपने पक्ष को प्रभावी ढंग से रखना बताया जा रहा है.

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पाकिस्तान दूतावास ने किया समझौता

वॉशिंगटन स्थित पाकिस्तान दूतावास ने 1 मई को इरविन ग्रेव्स स्ट्रैटेजी ग्रुप LLC के साथ दो वर्षों के लिए यह समझौता किया है. इस अवधि के दौरान लॉबिंग फर्म पाकिस्तान की ओर से अमेरिकी नीति निर्माताओं, कांग्रेस की प्रमुख समितियों, प्रभावशाली संगठनों, विशेषज्ञों और निवेशकों के साथ संपर्क बनाएगी. इस अभियान के जरिए पाकिस्तान खुद को क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद विरोधी प्रयासों में एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में पेश करना चाहता है. इसके अलावा वह अमेरिका से खनिज संसाधन, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), दवा उद्योग, कृषि और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की कोशिश भी करेगा. हालांकि, कई विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारना आसान नहीं होगा. इसकी वजह यह है कि देश लंबे समय से मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना कर रहा है.

पाकिस्तान के खिलाफ कई गंभीर आरोप

पाकिस्तान के खिलाफ बलूचिस्तान में जबरन लोगों के गायब होने, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगातार उठते रहे हैं. मानवाधिकार संगठनों ने कई बार बलूचिस्तान में कथित गैर-न्यायिक हत्याओं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध और असहमति जताने वालों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानूनों के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है. वॉशिंगटन स्थित विश्लेषक और जियो पॉलिटिक्स एक्सपर्ट्स सुरिंदर ज़ुराही का कहना है कि ऐसे मुद्दे पश्चिमी देशों में पाकिस्तान की छवि को प्रभावित करते हैं. उनके अनुसार, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के नीति निर्माता लोकतंत्र, आतंकवाद को वित्तीय सहायता, अल्पसंख्यकों के अधिकार और मानवाधिकारों के मामलों पर पाकिस्तान की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं.

पाकिस्तान में  धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति
 
पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति भी अक्सर चर्चा का विषय रही है. हिंदू, ईसाई और अहमदिया समुदायों के खिलाफ भेदभाव, जबरन धर्म परिवर्तन और ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग जैसे आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं. ऐसे में आर्थिक संकट और घरेलू चुनौतियों के बीच पाकिस्तान का यह कदम चर्चा का विषय बन गया है. एक ओर देश की बड़ी आबादी महंगाई और आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि सुधारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है.

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