समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के कथित बयान को लेकर उत्तराखंड में सियासी घमासान शुरू हो गया है. उत्तराखंड के संदर्भ में घुसपैठिया शब्द के इस्तेमाल को लेकर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है. जबकि कांग्रेस ने भाजपा पर बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है. बीजेपी प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ दो बार यूपी के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और करीब 25 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, ऐसे में उन्हें घुसपैठिया कहना उचित नहीं है.
उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव ने उत्तराखंड का नाम लेकर टिप्पणी की है, तो उसका संबंध पूरे प्रदेश से माना जाएगा. जोशी ने अखिलेश यादव के पारिवारिक रिश्तों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पत्नी डिंपल यादव उत्तराखंड से हैं और उनके छोटे भाई की पत्नी अपर्णा यादव का भी इस प्रदेश से संबंध है, ऐसे में इस तरह की टिप्पणी पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
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‘प्रदेश के लोगों की भावनाएं आहत कर सकती है ऐसी भाषा’
जोशी ने कहा कि उत्तराखंड के लाखों लोग उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में रहते हैं और दोनों राज्यों के बीच गहरे सामाजिक रिश्ते हैं, ऐसे में इस तरह की भाषा प्रदेश के लोगों को आहत कर सकती है. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव जैसे नेता से ऐसी टिप्पणी की उम्मीद नहीं थी ,भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि उत्तराखंड की जनता 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका जवाब देगी.
बीजेपी के आरोपों पर कांग्रेस का पलटवार
वहीं, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट ने भाजपा के आरोपों पर पलटवार किया , उन्होंने कहा कि भाजपा हर मुद्दे को तोड़-मरोड़कर पेश करने में माहिर है ,कांग्रेस उत्तराखंड के खिलाफ किसी भी टिप्पणी का समर्थन नहीं करती, लेकिन अखिलेश यादव के बयान को उसके राजनीतिक संदर्भ में समझना जरूरी है , बिष्ट के अनुसार अखिलेश यादव की टिप्पणी उत्तराखंड के खिलाफ नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर थी.
बिष्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार के कामकाज पर सवाल उठाना विपक्ष का राजनीतिक अधिकार है. यदि कोई उत्तराखंड की जनता को निशाना बनाकर टिप्पणी करता है, तो कांग्रेस उसका भी विरोध करेगी हालांकि, राजनीतिक बयानों को संदर्भ से अलग करके पेश करना उचित नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही है.
बयान के संदर्भ पर आमने-सामने दोनों दल
अखिलेश यादव के बयान को लेकर भाजपा और कांग्रेस के तर्क अलग-अलग हैं. भाजपा इसे उत्तराखंड के सम्मान और स्वाभिमान से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि बयान को उत्तर प्रदेश की राजनीति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. अब देखना होगा कि इस विवाद पर अखिलेश यादव की ओर से क्या सफाई आती है और आगामी विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा कितना प्रभाव डालता है.
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