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बस्ती: शराब की दुकानों पर मिलावट का खेल, सील बंद बोतलों में मिला रहे थे पानी


उत्तर प्रदेश के बस्ती में शराब की दुकानों पर मिलावटखोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है. अब तक शराब के शौकीनों द्वारा शराब में पानी मिलाकर सेवन किए जाने की बातें आम तौर पर सुनने को मिलती थीं, लेकिन बस्ती में शराब की दुकानों पर ही सील बंद मदिरा में पानी मिलाकर बेचने का कथित खेल चल रहा था. 

आबकारी विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त कार्रवाई में इस पूरे मामले का खुलासा हुआ है. विभागीय जांच के दौरान विदेशी मदिरा की तीन दुकानों पर शराब में डाइल्यूशन यानी पानी मिलाए जाने की पुष्टि होने के बाद तीनों दुकानों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

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कई महीनों से मिल रही थी शिकायत 

मामला मुंडेरवा, सिविल लाइन और कुसौरा बाजार स्थित विदेशी मदिरा की दुकानों से जुड़ा हुआ है. बताया जा रहा है कि इन दुकानों पर पिछले कई महीनों से शराब में पानी मिलाकर बिक्री किए जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं. शराब खरीदने वाले ग्राहकों द्वारा भी मदिरा की गुणवत्ता और उसके स्वाद को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे. 

हालांकि, शुरुआत में इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया. लेकिन जब विभागीय स्तर पर जांच-पड़ताल की गई और खुद आबकारी विभाग के अधिकारियों को डाइल्यूशन वाली मदिरा मिली तो पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया.

आबकारी और पुलिस टीम ने की छापेमारी 

मामले की गंभीरता को देखते हुए आबकारी विभाग और पुलिस विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से तीनों दुकानों पर छापेमारी की. जांच के दौरान शराब में निर्धारित गुणवत्ता से छेड़छाड़ और डाइल्यूशन पाए जाने का मामला सामने आया. इसके बाद विभाग ने बिना देर किए मुंडेरवा, सिविल लाइन और कुसौरा बाजार की तीनों विदेशी मदिरा दुकानों को निलंबित करने की कार्रवाई की. संबंधित अनुज्ञापियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया है.

वहीं, इस मामले में संबंधित सेल्समैन के विरुद्ध भी कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. विभागीय कार्रवाई से जिले के शराब कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है. इस घटना ने शराब की दुकानों पर होने वाली बिक्री और मदिरा की गुणवत्ता की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

विभाग की सक्रियता पर उठे सवाल 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि दुकानों पर सील बंद शराब में ही पानी मिलाकर बिक्री किए जाने का खेल चल रहा था तो इसकी भनक संबंधित जिम्मेदारों को इतने दिनों तक क्यों नहीं लगी? क्या यह खेल केवल तीन दुकानों तक सीमित था या जिले की अन्य मदिरा दुकानों पर भी इसी तरह की गड़बड़ी की आशंका है? साथ ही यह भी जांच का विषय है कि ग्राहकों से पूरी कीमत वसूलने के बावजूद उन्हें निर्धारित गुणवत्ता वाली शराब क्यों नहीं उपलब्ध कराई जा रही थी.

इस कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था और जिले की अन्य मदिरा दुकानों की जांच को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है. अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और क्या जिले की अन्य दुकानों पर भी इसी तरह की जांच कराई जाएगी.

जिला आबकारी अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि मामले में विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई है. तीन दुकानों को निलंबित किया गया है और संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है.

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