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‘मन में कड़वाहट है…’, पवार-शिंदे की मुलाकात के बीच सुप्रिया सुले से संजय राउत ने की बात, फिर दिया बयान


महाराष्ट्र की राजनीति में बीते दिनों से सियासी घमासान जारी है. इस बीच शरद पवार और एकनाथ शिंदे की मुलाकात ने बवाल खड़ा कर दिया है. राज्य की इस राजनीतिक स्थिति के बीच उद्धव गुट के सांसद संजय राउत लगातार निशाना साध रहे हैं. इस बीच शरद पवार गुट के सांसदों के अस्वस्थ होने के बयान पर संजय राउत ने टिप्पणी की है.

संजय राउत ने कहा, “शिवसेना के छह सांसद तोड़े गए. ‘अस्वस्थ’ जैसी बातों को हम नहीं मानते. आप मशाल चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए हैं, फिर अस्वस्थ होने का कारण क्या है? आपने मशाल चुनाव चिन्ह स्वीकार किया, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) का नेतृत्व स्वीकार किया और चुनाव जीते. इसी तरह, पार्टी टूटने के बाद और अजित पवार द्वारा पार्टी तोड़े जाने के बाद आप शरद पवार के नेतृत्व वाली मूल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के तुतारी चुनाव चिन्ह पर लोकसभा चुनाव लड़े.

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अस्वस्थ होने का कोई कारण नहीं है- संजय राउत

संजय राउत ने कहा, “शरद पवार साहब ने घर-घर जाकर सांसदों को जिताया है. अस्वस्थ होने का कोई कारण नहीं है. महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवारों को मोदी-शाह के खिलाफ मतदान करने वाली जनता ने चुना है, फिर अस्वस्थ क्यों हो रहे हैं? किससे डर रहे हैं?” उन्होंने कहा कि अस्वस्थ कोई नहीं होता. मोदी-शाह और कुछ अन्य लोग दबाव की राजनीति करते हैं और इसी तरह लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं.

कांग्रेस नेता के बयान पर क्या बोले राउत?

संजय राउत ने आगे कहा, “कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं. उनके पास जो भी जानकारी होगी, वह उन्होंने निश्चित रूप से शरद पवार साहब तक पहुंचाई होगी. हमारे छह सांसद क्यों गए? क्या वे अस्वस्थ थे? ये कैसा विकास कर रहे हैं? 100 करोड़ रुपये भी दे दिए जाएं तो भी ये विकास नहीं कर सकते.”

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी अब तक वाराणसी का विकास नहीं कर पाए. नागपुर जाकर देखिए क्या विकास हुआ है. नांदेड़ में कल पुल गिर गया, मिसिंग लिंक का हिस्सा गिर गया, पूरे राज्य की सड़कें गड्ढों से भरी हैं. आखिर किस विकास के लिए इन्हें अस्वस्थ होना चाहिए?

संजय राउत ने आगे दावा करते हुए कहा कि 2029 में इंडिया गठबंधन सत्ता में आएगा और महाराष्ट्र की इस भ्रष्ट सरकार को हम उखाड़ फेंकेंगे. हमें पूरा विश्वास है. जब हम विपक्ष में थे, तब आप हमारे पास आए थे. आपको मालूम था कि हम सत्ता में नहीं थे.

एकनाथ शिंदे-शरद पवार की मुलाकात पर क्या कहा?

एकनाथ शिंदे-शरद पवार की मुलाकात पर कहा कि शरद पवार पवार और सुप्रिया ताई से मेरी चर्चा हुई. हमने सिर्फ अपनी भावनाएं व्यक्त कीं. ठीक है, मन में कड़वाहट है. एकनाथ शिंदे ने पार्टी छोड़ी और बीजेपी में चले गए, यह हमारा विवाद नहीं है. विवाद इस बात का है कि अमित शाह की मदद से उन्होंने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना पर कब्जा किया.

उन्होंने कहा कि अजित पवार का शरद पवार का साथ छोड़ना विवाद नहीं है. विवाद इस बात का है कि शरद पवार के जीवित रहते उनके द्वारा स्थापित पार्टी पर अमित शाह की मदद से कब्जा किया गया. जैसे राम मंदिर की लूट हुई, वैसे ही इस पार्टी की भी लूट हुई.

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‘बालासाहेब की पार्टी के मालिक आप कैसे बन गए?’

संजय राउत ने शिंदे गुट से सवाल पूछा कि बालासाहेब ठाकरे की पार्टी के मालिक आप कैसे बन गए? आप उस पार्टी के मां-बाप कैसे बन गए? क्या पार्थ पवार, जय पवार, सुनेत्रा पवार, सुनील तटकरे या प्रफुल्ल पटेल शरद पवार की स्थापित पार्टी के मां-बाप हो सकते हैं? असली पिता तो आज भी सिल्वर ओक और वाई.बी. चव्हाण सेंटर में बैठे हैं.

उन्होंने कहा कि जो लोग मुझ पर आलोचना करते हैं, उनके भीतर भी स्वाभिमान की चिंगारी होनी चाहिए. हमारे भीतर वह है. शरद पवार साहब हमारे नेता हैं. वे महाविकास आघाड़ी के सर्वोच्च नेता हैं. उनके प्रति मेरे मन में हमेशा श्रद्धा और सम्मान रहेगा. उनका मुझ पर स्नेह है. कल हम अस्वस्थ हुए तो हमने अपनी भावना व्यक्त की.

राउत ने आगे यह भी कहा कि एकनाथ शिंदे हमें कड़वाहट की बात करते हैं, लेकिन उनके भीतर कितनी कड़वाहट भरी है. अगर वह बाहर आ जाए तो क्या होगा? शरद पवार जैसे नेता जब किसी व्यक्ति से मिलते हैं तो उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा बढ़ती है. लेकिन जब वे हमारी नजर में किसी गद्दार से मिलते हैं तो उस गद्दार की प्रतिष्ठा बढ़ती है. मैंने सिर्फ यही बात कही थी.

पिंपरी-चिंचवड़ शैक्षणिक घोटाला

पिंपरी-चिंचवड़ शैक्षणिक घोटाले पर बोलते हुए कहा कि पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका में स्कूलों के लिए शैक्षणिक सामग्री खरीदी गई. नियम के अनुसार तीन लाख रुपये से अधिक की खरीद पर टेंडर निकालना जरूरी होता है. लेकिन इस मामले में जगदंब टेक्सटाइल नाम की कंपनी को करीब साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये का काम बेहद ऊंची दरों पर दे दिया गया.

उन्होंने बताया कि मामला हाईकोर्ट गया, जहां कोर्ट ने फटकार लगाई. फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां सुप्रीम कोर्ट ने जगदंब के लिए दर तय की और उसी दर पर सामग्री देने का निर्देश दिया. वास्तविक कीमत 239 करोड़ रुपये थी, लेकिन महानगरपालिका ने 894 करोड़ रुपये की दर से खरीद की. यानी करीब 547 करोड़ रुपये का अंतर है.

संजय राउत ने दावा किया कि करीब साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये का यह घोटाला है. महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ मंत्री ने फोन कर कहा कि यह काम इसी कंपनी को देना है, टेंडर नहीं निकालना है. यह पूरी तरह गैरकानूनी और भ्रष्टाचार है. संबंधित मंत्री तक उसी दिन 95 करोड़ रुपये पहुंचाए गए. वह मंत्री कौन है, यह देवेंद्र फडणवीस को पता है. इससे महाराष्ट्र की बदनामी हुई है. मुलुंड के वे “नंगे पोपटलाल” कहां गए? अगर शरीर पर कपड़े बचे हैं तो जाकर आयुक्त के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करें. ईडी कहां है? एंटी करप्शन ब्यूरो कहां है?

ठाणे में डॉक्टर और नर्स से मारपीट पर क्या बोले?

ठाणे में रमेश म्हात्रे द्वारा डॉक्टर और नर्स से मारपीट के मामले पर संजय राउत ने कहा कि इस घटना के लिए राज्य के गृह मंत्री जिम्मेदार हैं. खासकर ठाणे जिले में पुलिस उनकी बात नहीं सुनती. ठाणे पुलिस आयुक्त और ठाणे पुलिस उपमुख्यमंत्री के घर के नौकर बन गए हैं. इस मामले में न्यायपालिका की ही नहीं, बल्कि पुलिस की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है.

समान नागरिक संहिता (UCC) पर की ये टिप्पणी

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर संजय राउत ने कहा, “जो समिति बनाई गई है, उसे देखकर ही पता चल जाता है कि उसमें किन लोगों को शामिल किया गया है. समिति सर्वसमावेशी होनी चाहिए. उसमें अलग-अलग विचारधारा के लोगों को शामिल किया जाना चाहिए. अगर समान नागरिक संहिता लानी है तो दोनों सदनों के प्रमुख नेताओं को समिति में शामिल किया जाना चाहिए. यह किसी एक दल का विषय नहीं हो सकता.”

उन्होंने आगे कहा, “इस कानून की मांग सबसे पहले बालासाहेब ठाकरे ने उठाई थी. समिति में ऐसे लोगों को रखा गया है जो इनके इशारों पर चलेंगे. रंजना देसाई को जानबूझकर यह जिम्मेदारी दी गई है. यह कुछ रहस्यमय और संदेहास्पद लगता है. अगर बीजेपी इस मुद्दे में राजनीति लाती है तो हमें इसे बहुत गंभीरता और सतर्कता से देखना होगा.”

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