केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और राहुल गांधी के बीच महिला आरक्षण को लेकर चल रही बहस में अब पी. चिदंबरम भी शामिल हो गए हैं. उन्होंने मांग की है कि इसे जनगणना और परिसीमन की प्रक्रियाओं से अलग किया जाए. शनिवार को एक्स पर दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली. रिजिजू का कहना है कि महिला आरक्षण बिल 2034 के आम चुनावों से पहले लागू नहीं हो सकता क्योंकि यह 2026 के बाद की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा है.
राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए कहा कि यह कानून 3 साल पहले सर्वसम्मति से पारित किया गया था और इसे बिना किसी शर्त के लागू किया जाना चाहिए. महिला आरक्षण और परिसीमन पर कांग्रेस का रुख दोहराते हुए पी. चिदंबरम ने इसे केंद्र सरकार का छिपा एजेंडा बताया. उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ा गया.
पी. चिदंबरम ने कहा कि किरेन रिजिजू गलत हैं. राहुल गांधी ने बताया है कि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान पहले से ही कानून में मौजूद है. बीजेपी सरकार ने इसे बेवजह और शरारतपूर्ण तरीके से जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया था.
चिदंबरम ने बताया सरकार का छिपा एजेंडा
उन्होंने आगे कहा, “हमने 2023 में ही यह बात कही थी, लेकिन सरकार अपनी बात पर अड़ी रही क्योंकि उनका कोई छिपा हुआ एजेंडा था. अगर इस जुड़ाव को खत्म कर दिया जाए, तो महिलाओं के लिए आरक्षण को तुरंत लागू किया जा सकता है और 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले इसे अमल में लाया जा सकता है. किरेन रिजिजू पूरी तरह गलत हैं.”
क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 संसद के दोनों सदनों में पारित हो गया था, लेकिन लागू करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ा जा सका क्योंकि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 17 अप्रैल को लोकसभा में गिर गया. इस कारण मतदान करने वाले सदस्यों का संवैधानिक रूप से आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया था. संविधान संशोधन विधेयक में विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण और लोकसभा में परिसीमन लागू करने का प्रस्ताव था.
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