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238 करोड़ के बैंक फ्रॉड में ED का एक्शन, GMADA में 26 ठिकानों पर छापे और सर्वे


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  • छापों में हवाला चैट, नेताओं की अनौपचारिक बैठकें मिलीं।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में पंजाब के GMADA से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच को लेकर बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में कुल 26 परिसरों पर छापेमारी और सर्वे किए. कार्रवाई तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े प्रमोटरों, निदेशकों और अन्य संबंधित कंपनियों के खिलाफ चल रही जांच के तहत की गई.

ईडी के मुताबिक, कार्रवाई की जद में Remigate Buildestates (India) Pvt Ltd, MB Infrabuild Pvt Ltd, Mera Baba Reality Associates Pvt Ltd और Mera Baba Infrastructure Pvt Ltd से जुड़े लोग भी आए. GMADA और पंजाब सरकार के हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग के कार्यालयों में भी PMLA की धारा 16 के तहत सर्वे किया गया. बाद में कुछ स्थानों पर इसे छापे में तब्दील कर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई.

238 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड से शुरू हुई जांच

ईडी के अनुसार, जांच CBI की एक एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी, जिसमें तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स के प्रमोटरों पर करीब 238 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड और रकम को निजी लाभ के लिए डायवर्ट करने के आरोप थे. प्री-सर्च जांच में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नकद लेनदेन, फर्जी शेयर प्रीमियम और अन्य वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी सामने आई.

ईडी का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर प्रमोटरों जगमोहन गर्ग और मनमोहन गर्ग के अन्य मामलों से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आई. इनमें NSEL से जुड़ा मामला, GMADA से कथित वैधानिक देनदारियों की माफी और रद्द किए गए प्लॉट के पुनर्आवंटन से जुड़े मामले शामिल हैं.

रेमिगेट को 57 करोड़ रुपये के लाभ का दावा

ईडी के अनुसार, उपलब्ध जानकारी में रेमिगेट से जुड़े मामले में करीब 57 करोड़ रुपये के वैधानिक बकाये की कथित माफी से आर्थिक लाभ दिए जाने की बात सामने आई है. एजेंसी ने वरिष्ठ GMADA अधिकारियों की मिलीभगत से जुड़ी सूचना अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ PMLA की धारा 66(2) के तहत साझा किए जाने की बात कही है.

कई वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े परिसरों की जांच 

ईडी की कार्रवाई में वरिष्ठ अधिकारियों और पूर्व अधिकारियों से जुड़े परिसरों को भी शामिल किया गया. इनमें पंजाब सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी विकास गर्ग, GMADA के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर संदीप ऋषि, एडिशनल चीफ एडमिनिस्ट्रेटर अमरिंदर मल्ही, लैंड एक्विजिशन कलेक्टर रोहित जिंदल, पूर्व चीफ एडमिनिस्ट्रेटर राजीव गुप्ता और तिला कंसल्टेंसी से जुड़े कीर्ति साधु बस सहित रेमिगेट और तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स के निदेशक और प्रमोटर शामिल बताए गए हैं.

AAP नेताओं के साथ कथित अनौपचारिक बैठकों का भी दावा

ईडी की सर्च में सामने आई जानकारी के आधार पर एजेंसी ने आरोप लगाया है कि AAP नेताओं सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया की GMADA अधिकारियों के साथ मास्टर प्लान और साइट ऑक्शन से जुड़े मुद्दों पर अनौपचारिक बैठकें होती थीं. एजेंसी का दावा है कि नई नीलामी, अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों पर कथित तौर पर अनौपचारिक निर्देशों का प्रभाव था.

ईडी के अनुसार, PUDA भवन से फाइलें कथित तौर पर अनौपचारिक बैठकों के लिए बाहर ले जाई जाती थीं. एजेंसी ने चंडीगढ़ के सेक्टर-39 स्थित एक मकान का भी उल्लेख किया है, जिसके संबंध में उसका दावा है कि वहां GMADA से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों पर चर्चा होती थी. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस नोट में उपलब्ध नहीं है.

अधिकारियों के फोन में हवाला भुगतान की चैट मिलने का दावा

छापे के दौरान जब्त किए गए कुछ अधिकारियों के मोबाइल फोन में कथित तौर पर हवाला भुगतान से संबंधित चैट मिलने की बात भी ईडी ने कही है. एजेंसी के अनुसार इनमें पंजाब सरकार से जुड़े कुछ राजनेताओं के रिश्तेदारों को भुगतान का उल्लेख था.

लैंड एक्विजिशन में भी अनियमितताओं का दावा

ईडी के अनुसार, तिला कंसल्टेंसी लिमिटेड, जिसे कीर्ति साधु बस और अर्चना झा से नियंत्रित बताया गया है, GMADA और PUDA भवन परिसर में काम कर रही थी और GMADA के लैंड एक्विजिशन कलेक्टर के कर्मचारियों के साथ निकट संपर्क में थी.

एजेंसी ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन कानून, 2013 के तहत मुआवजा भुगतान में अनियमितताओं का भी दावा किया है. इनमें धारा 11 की अधिसूचना के बाद कलेक्टर की छूट के बिना ट्रांसफर डीड की अनुमति और एक ही खसरा नंबर के सह-हिस्सेदारों को अलग-अलग तरीके से LOI जारी किए जाने जैसी बातें शामिल हैं.

GMADA की जमीन के रिजर्व प्राइस में हेरफेर का आरोप

ईडी का दावा है कि GMADA के बिना बिके जमीन बैंक की नीलामी से पहले रिजर्व प्राइस को नीचे किया गया, जिससे पंजाब और GMADA को करीब 10 हजार करोड़ रुपये तक के संभावित नुकसान और बिल्डरों-राजनेताओं को लाभ पहुंचाने की आशंका सामने आई है. यह एजेंसी की तरफ से जांच में सामने आया आरोप है. इसकी अंतिम पुष्टि जांच/न्यायिक प्रक्रिया में होनी है. 

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