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4 दिन, 3 बड़े बिल, मानसून सत्र के आखिरी हफ्ते में चढ़ेगा सियासी पारा


मानसून सत्र खत्म होने में चार दिन बचे हैं. ऐसे में संसद में चल रही रुकावट के बीच वीमेन रिजर्वेशन, डिलिमिटेशन और फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) जैसे बड़े बिलों का भविष्य अधर में है. इनमें से कोई भी बिल सोमवार (10 अगस्त) को लोकसभा की कामकाज लिस्ट में नहीं था. 

सरकार की कोशिशों के बाद कुछ विपक्षी पार्टियों ने महिला कोटा और डिलिमिटेशन बिल पर अपना रुख नरम करने के संकेत दिए हैं. कांग्रेस और उसके ज्यादातर सहयोगी दलों ने इन कानूनों और FCRA अमेंडमेंट बिल का विरोध कर रही है. 

संविधान अमेंडमेंट बिल, इसमें 2029 में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत रिजर्वेशन और सदन की सीटें बढ़ाने के लिए लोकसभा इलाकों को फिर से बनाने का प्रस्ताव है. अप्रैल में दो तिहाई बहुमत हासिल करने में नाकाम रहने के  कारण गिर गया था. 

FCRA का क्यों विरोध कर रही कांग्रेस? 

FCRA संशोधन बिल 2026 की बात करें, तो इस साल 25 मार्च को यह लोकसभा में पेश किया गया था. इस पर चर्चा और पास होना है. AICC के जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार को लगता है कि वे इन दो या तीन दिनों में फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल ला सकते हैं, तो उन्हें अपनी यह इच्छा अपने तक ही रखना चाहिए. 

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया है कि प्रस्तावित कानून अल्पसंख्यकों और एनजीओ को टारगेट करता है. उन्होंने कहा कि विपक्ष इसे पास नहीं होने देगा. अगर अमित शाह भी इस जनविरोधी बिल को पास करने आते हैं, तो इसमें कोई शक नहीं कि संसद में कड़े विरोध का सामना करना पड़े. यह बिल असंवैधानिक और जनविरोधी है. 

इसके अलावा पिछले हफ्ते सरकार ने महिला आरक्षण और डीलिमिटेशन बिल पर विपक्ष से समर्थन हासिल करने की कोशिशें की. हालांकि, इस मामले में सफलता न के बराबर है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रुकावट खत्म करने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी से दो बार मुलाकात की है. 

इसके अलावा रिजिजू ने उनसे फोन पर बात की. सूत्रों का कहना है कि जब रिजिजू ने महिला आरक्षण और डीलिजिमिटेशन बिल पास कराने में कांग्रेस से सपोर्ट मांगा तो विपक्ष के नेता ने प्रस्तावित कानूनों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने पर जोर दिया. दोनों नेताओं के बीच इस मसले पर सोशल मीडिया पर भी बहस देखने को मिली. इसमें महिला कोटा और डीलिमिटेशन बिल मुख्य रूप से चर्चा में थे. 

इधर एक तरफ सरकार विपक्ष के अन्य दलों जिनमें समाजवादी पार्टी और डीएमके समेत अन्य नेता इन बिलों पर उनका विचार जानने की कोशिश कर रहे हैं. 

वहीं अगर देखें तो डीएमके अब इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं है. 22 लोकसभा सदस्यों के साथ यह पार्टी सदन में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है. राज्यसभा में 8 सदस्य डीएमके को दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बनाते हैं. शिरोमणि अकाली दल ने शनिवार को महिला आरक्षण बिल और डिलिमिटेशन बिल पर अपना सपोर्ट दिया है. पंजाब में इस पार्टी का सिर्फ एक एमपी है. पार्टी चीफ सुखबीर सिंह बादल ने पीएम मोदी से मुलाकात की है. 

तमिलनाडु सरकार ने परिसीमन के खिलाफ पारित किया प्रस्ताव

शनिवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की तरफ से बुलाई मीटिंग में राज्य के कुछ सांसदों की मौजूदगी वाली बैठक में परिसीमन के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया गया है. लोकसभा सीटों की संक्या 543 पर ही बनाए रखने की मांग की गई है. विपक्षी पार्टी डीएमके और एआईएडीएमके ने इस मीटिंग का विरोध किया. वहीं, एनसीपी (एसपी) के कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने शनिवार को परिसीमन बिल पर फिलहाल किसी तरह की टिप्पणी नहीं की है. उन्होंने बस इतना कहा है कि जब यह बिल आएगा, तो हम अपने गठबंधन के सहयोगियों के साथ हर बिल पर चर्चा करेंगे. 

कांग्रेस ने जारी किया व्हिप

इससे पहले अप्रैल में 131वां संशोधन बिल को संसद में मंजूरी दिलाने के लिए 16 से 18 अप्रैल के बीच विशेष सत्र बुलाया गया था. लेकिन तब यह बिल गिर गया था. पीएम मोदी के कार्यकाल में पहली बार कोई बिल गिर गया था. फिलहाल 299 का एनडीए गठबंधन अभी भी 360 के आंकड़े से काफी पीछे है. शुक्रवार को कांग्रेस ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी किया है. साथ ही राज्यसभा और लोकसभा में उपस्थित होने को कहा है. 



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