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CBSE रिजल्ट के बाद बढ़ी छात्रों की टेंशन, 4 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने मांगी अपनी कॉपियों की स्कैन कॉपी


CBSE बोर्ड का रिजल्ट आते ही हर साल लाखों छात्रों के घरों में खुशी और तनाव दोनों साथ आते हैं. कोई अच्छे नंबर आने पर जश्न मनाता है, तो कोई अपनी मार्कशीट देखकर सोच में पड़ जाता है कि आखिर इतने कम नंबर कैसे आ गए. इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. लेकिन 2026 में एक बड़ा बदलाव साफ दिखाई दिया है इस बार रिकॉर्ड संख्या में छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच और स्कैन कॉपी मांगी है.

CBSE ने अब आंसर बुक प्रक्रिया को लेकर नया अपडेट जारी किया है, जिसने छात्रों और अभिभावकों दोनों का ध्यान खींच लिया है. बोर्ड के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 26 मई 2026 शाम 6 बजे तक कुल 4,04,319 छात्रों ने अपनी जांची हुई कॉपियों की स्कैन्ड कपीस के लिए आवेदन किया है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन छात्रों ने कुल 11,31,961 आंसर बुक्स की मांग की है. यानी एक छात्र ने सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई विषयों की कॉपियां देखने की इच्छा जताई है.

छात्रों में क्यों बढ़ रही है बेचैनी?

रिजल्ट आने के बाद कई छात्रों को लगता है कि उन्हें उम्मीद से कम नंबर मिले हैं. कुछ छात्रों को विश्वास होता है कि उनकी कॉपी ठीक से चेक नहीं हुई, तो कुछ को नंबर जोड़ने में गलती की आशंका रहती है. यही वजह है कि इस बार बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी आंसर शीट देखने का फैसला किया.

CBSE के मुताबिक अब तक 8,98,214 आंसर बुक्स डिजिटल रूप से छात्रों को उपलब्ध करा दी गई हैं. बाकी बची हुई पेंडिंग रिक्वेस्ट को 27 मई 2026 तक पूरा कर दिया जाएगा. बोर्ड का कहना है कि पूरी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की कोशिश की जा रही है ताकि छात्रों को ज्यादा इंतजार न करना पड़े.

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29 मई तक खुलेगा नया पोर्टल

CBSE ने यह भी जानकारी दी है कि आंसर बुक्स की वेरिफिकेशन और री- इवैल्यूएशन के लिए आवेदन पोर्टल 29 मई 2026 तक लाइव होने की उम्मीद है. यानी जिन छात्रों को लगता है कि उनकी कॉपी में नंबर कम दिए गए हैं या कोई गलती हुई है, वे जल्द ही दोबारा जांच के लिए आवेदन कर सकेंगे. बोर्ड की यह सुविधा छात्रों के लिए काफी अहम मानी जाती है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी कॉपी देखने और गलती होने पर सुधार का मौका मिलता है.

पिछले साल के मुकाबले कई गुना बढ़े आवेदन

सीबीएसई के आंकड़े इस बार एक बड़ा बदलाव दिखा रहे हैं. साल 2025 में मार्क्स वेरिफिकेशन और री-चेकिंग के लिए करीब 1.31 लाख छात्रों ने आवेदन किया था. उस समय लगभग 2.82 लाख आंसर शीट को चैलेंज किया गया था. लेकिन 2026 में स्थिति पूरी तरह बदल गई है. इस बार 4 लाख से ज्यादा छात्रों ने 11.31 लाख आंसर बुक्स की स्कैन्ड कपीस मांगी हैं. यानी पिछले साल की तुलना में यह संख्या कई गुना ज्यादा है.

शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि छात्रों में नंबरों को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है. आज के समय में कुछ अंकों का फर्क कॉलेज एडमिशन और करियर पर असर डाल सकता है. यही कारण है कि छात्र अब अपने नंबरों को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं.

अभिभावकों की भी बढ़ी चिंता

सिर्फ छात्र ही नहीं, अभिभावक भी इस प्रक्रिया पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. कई माता-पिता का मानना है कि अगर छात्र ने मेहनत की है, तो उसे उसका सही परिणाम मिलना चाहिए. यही वजह है कि अब लोग वेरिफिकेशन और री इवैल्यूएशन को गंभीरता से लेने लगे हैं.

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