भारत की विदेश नीति में पिछले कुछ वर्षों में जो बदलाव दिखे हैं, उन्हें लेकर भारत में अमेरिका के राजदूत रह चुके केन जस्टर ने एक अहम बात कही है. उनका मानना है कि इस बदलाव की एक बड़ी वजह 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सत्ता में आना है. केन जस्टर के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया के साथ अपने रिश्तों को लेकर ज्यादा आत्मविश्वास दिखाया है. पहले के मुकाबले अब भारत ज्यादा देशों के साथ संपर्क बना रहा है और अपने संबंधों का दायरा भी बढ़ा रहा है. इसका मतलब यह है कि भारत अब सिर्फ सीमित दायरे में नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहता है.
दुनिया के बड़े फैसलों में भारत की भूमिका
केन जस्टर ने कहा कि पीएम मोदी के समय में भारत खुद को एक ऐसी ताकत के रूप में देख रहा है, जो दुनिया के बड़े फैसलों में अपनी भूमिका निभाना चाहता है. अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सक्रियता बढ़ी है और वह वैश्विक समुदाय में अपनी पहचान को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. व्यापार के मामले में भी भारत का रुख कुछ हद तक बदला हुआ नजर आता है. पहले के मुकाबले अब भारत थोड़ा ज्यादा खुलापन दिखा रहा है, लेकिन पूरी तरह से नहीं. भारत एशिया के देशों के साथ अपने रिश्तों को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. खासकर अपने पड़ोसी देशों जैसे बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के साथ संबंध बेहतर बनाने पर ध्यान दे रहा है.
अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते में भारत की सूझबूझ
केन जस्टर के मुताबिक भारत ASEAN देशों के साथ भी और करीब से काम करना चाहता है. इन क्षेत्रों में भारत को नए अवसर दिखाई दे रहे हैं और वह उन्हें बेहतर तरीके से इस्तेमाल करना चाहता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत हर तरह के अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते में शामिल होने के लिए तैयार है. भारत ने RCEP यानी रीजनल इकोनॉमिक कोऑपरेशन पार्टनरशिप से खुद को अलग रखा है. इसके अलावा, उसने CPTPP जैसे बड़े व्यापार समझौते में भी शामिल होने में कोई खास रुचि नहीं दिखाई है. इससे यह साफ होता है कि भारत अपने हितों को ध्यान में रखते हुए ही फैसले ले रहा है और हर समझौते में शामिल होने के लिए जल्दबाजी नहीं कर रहा.
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