NEET-UG समेत देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर पिछले कुछ वर्षों में लगातार सवाल उठे हैं. खासकर NEET पेपर लीक के मामलों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की साख को गंभीर झटका पहुंचाया. इसी पृष्ठभूमि में NTA ने अब अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है.
एजेंसी ने तीन सीनियर पदों – जनरल मैनेजर (विजिलेंस, इन्वेस्टिगेशन एंड फॉरेंसिक), जनरल मैनेजर (इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी/CISO) और जनरल मैनेरेज ( टेस्ट सेंटर नेटवर्क एंड ऑपरेशन) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. इन तीनों पदों को देखें तो साफ संकेत मिलता है कि NTA अब सिर्फ परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नहीं रहना चाहती, बल्कि परीक्षा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और पूरे परीक्षा तंत्र की निगरानी के लिए एक प्रोफेशनल और संस्थागत व्यवस्था खड़ी करना चाहती है.
GM-विजिलेंस का क्या काम?
सबसे जरूरी पद जनरल मैनेजर,विजिलेंस, इन्वेस्टिगेशन एंड फॉरेंसिक का है. इस अधिकारी का काम केवल पेपर लीक होने के बाद जांच करना नहीं होगा, बल्कि परीक्षा से पहले ही जोखिम का आकलन करना, संदिग्ध नेटवर्क पर नजर रखना, कोचिंग माफिया और संगठित नकल गैंग की पहचान करना, डिजिटल फॉरेंसिक के जरिए सबूत जुटाना और CBI, IB, ED, साइबर सेल और राज्य पुलिस जैसी एजेंसियों के साथ तालमेल बनाना होगा. यानी NTA पहली बार अपने भीतर एक समर्पित जांच और इंटेलिजेंस तंत्र विकसित करना चाहती है.
दूसरा अहम पद चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर का है. पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा प्रक्रिया तेजी से डिजिटल हुई है. ऐसे में केवल प्रश्नपत्र की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सर्वर, डेटा, उम्मीदवारों की जानकारी और आईटी सिस्टम को साइबर हमलों से बचाना भी उतना ही जरूरी हो गया है. CISO का दायित्व 24×7 साइबर निगरानी, CERT-In और DPDP Act का अच्छे से काम करना, थर्ड पार्टी टेक्नोलॉजी कंपनियों की सुरक्षा जांच और पूरे सिस्टम की साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा.
तीसरा पद GM-टेस्ट सेंटर नेटवर्क एंड ऑपरेशन का है, जिसका फोकस परीक्षा केंद्रों की क्वॉलिटी, सिक्योरिटी और संचालन पर रहेगा. परीक्षा केंद्रों को बढ़ाना होगा और इसे छोटे शहरों और जिलों तक करना होगा , केंद्रों की सुविधाओं की निगरानी भी इस पद के लिए ज़रूरी काम होगा. इसका उद्देश्य परीक्षा के दिन होने वाली अव्यवस्था और संचालन संबंधी कमियों को कम करना भी है.
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क्या इससे सच में फर्क पड़ेगा?
इन नियुक्तियों से निश्चित रूप से NTA की संस्थागत क्षमता मजबूत हो सकती है. अब तक एजेंसी पर सबसे बड़ा आरोप यही रहा कि परीक्षा सुरक्षा के लिए उसके पास अपना मजबूत जांच तंत्र या साइबर विशेषज्ञता नहीं थी और घटनाओं के बाद उसे बाहरी एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता था. ऐसे में अगर इन पदों पर अनुभवी अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे और उन्हें पर्याप्त अधिकार, संसाधन और स्वतंत्र निर्णय लेने की इजाज़त मिलती है, तो परीक्षा सुरक्षा पहले की तुलना में काफी बेहतर हो सकती है.
हालांकि, केवल नई भर्तियां अपने आप समाधान नहीं हैं. असली परीक्षा इनके प्रभावी ढंग से लागू करना होगी. अगर प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्ट, डिजिटल सिस्टम, परीक्षा केंद्रों और जांच प्रक्रिया तक हर स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होती, तो केवल वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति से पेपर लीक जैसी घटनाएं पूरी तरह बंद होने की गारंटी नहीं दी जा सकती.
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